8 घंटे अटकी रही 250 यात्रियों की जान… सैन फ्रांसिस्को जा रही Air India फ्लाइट की इमरजेंसी लैंडिंग

सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल: 'एंटी-कोलिजन सिस्टम' यानी हवा में दूसरी उड़ानों से टक्कर रोकने वाला उपकरण हो गया था खराब, यात्रियों की जान जोखिम में डालने वाली इस गंभीर तकनीकी गड़बड़ी के सामने आते ही विमानन क्षेत्र में सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर बहस तेज हो गई है…

चाणक्य मंत्र ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली से सैन फ्रांसिस्को जा रही एयर इंडिया की अंतरराष्ट्रीय उड़ान में आई तकनीकी खराबी का मामला अब और गंभीर होता जा रहा है, क्योंकि ताजा इनपुट्स के अनुसार विमान का ‘एंटी-कोलिजन सिस्टम’ यानी हवा में दूसरी उड़ानों से टक्कर रोकने वाला बेहद संवेदनशील उपकरण खराब हो गया था। करीब 250 यात्रियों की जान जोखिम में डालने वाली इस गंभीर तकनीकी गड़बड़ी के सामने आते ही विमानन क्षेत्र में सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर बहस तेज हो गई है।

विश्लेषण के नजरिए से देखें तो यह घटना महज एक सामान्य खराबी नहीं, बल्कि एक बड़ा सुरक्षा संकट थी, जहां पायलटों के सामने न सिर्फ तकनीकी रूप से अपंग हो चुके विमान को संभालना था, बल्कि लंबी दूरी की उड़ान होने के कारण ईंधन के अत्यधिक वजन को कम करना भी एक बड़ी चुनौती थी। यही कारण था कि सुरक्षित लैंडिंग के नियमों का पालन करते हुए विमान को हवा में ही करीब आठ से नौ घंटे तक चक्कर काटने पड़े ताकि ईंधन जलकर कम हो सके और दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर आपातकालीन वापसी संभव हो सके।

हवा में बिताए गए ये घंटे यात्रियों के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं थे, लेकिन पायलटों की सूझबूझ ने एक बेहद भयावह स्थिति को बड़े हादसे में बदलने से रोक लिया। इस फॉलो-अप अपडेट ने एयर इंडिया के विमानों के रखरखाव और उड़ान से पहले होने वाली तकनीकी जांच की गुणवत्ता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। इतने महत्वपूर्ण सुरक्षा तंत्र का हवा में फेल हो जाना उड्डयन नियामक डीजीसीए के कड़े रुख की मांग करता है, क्योंकि इस तरह की पुनरावृत्ति न केवल सैकड़ों जिंदगियों को दांव पर लगाती है, बल्कि भारतीय नागरिक उड्डयन की वैश्विक विश्वसनीयता को भी ठेस पहुंचाती है।

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