मुंबई अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, रुपये की कमजोरी और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताह में भी भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिमी एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है। इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ रहा है। पिछले सप्ताह भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96 के स्तर से नीचे पहुंच गया, जिससे निवेशकों की बेचैनी और बढ़ गई। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि रुपये की चाल आने वाले दिनों में शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।
जानकारों का मानना है कि अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी स्थिति निवेशकों की नजर में सबसे बड़ा जोखिम बनी हुई है। यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि तनाव और बढ़ता है तो कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आ सकता है, जिसका असर महंगाई और बाजार दोनों पर पड़ेगा। फिलहाल ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 109 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी है।
बाजार विशेषज्ञों ने कहा कि इस सप्ताह चीन, अमेरिका और भारत से आने वाले आर्थिक आंकड़े भी निवेशकों की रणनीति तय करेंगे। इसके अलावा अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) की बैठक का विवरण भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
कॉर्पोरेट सेक्टर में Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum, GAIL और NTPC जैसी बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी।
गौरतलब है कि पिछले सप्ताह BSE Sensex 2,090 अंक और NIFTY 50 532 अंक से ज्यादा टूट गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक हालात स्थिर नहीं होते, तब तक बाजार में अनिश्चितता बनी रह सकती है।