नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी पांच देशों की छह दिवसीय विदेश यात्रा के तीसरे चरण में रविवार को नीदरलैंड से स्वीडन पहुंच गए। स्वीडन पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और स्वीडन के बीच व्यापार, निवेश, नवाचार और रक्षा सहयोग को नई मजबूती प्रदान करना है। प्रधानमंत्री की इस यात्रा को भारत-यूरोप आर्थिक संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि वह स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस दौरान दोनों नेता भारत और स्वीडन के संबंधों को और मजबूत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच तकनीक, निवेश, स्टार्टअप, रक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने एक अन्य संदेश में बताया कि वह स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन के साथ ‘यूरोपीय व्यापार गोलमेज सम्मेलन’ में भी भाग लेंगे। इस सम्मेलन में यूरोप के प्रमुख उद्योगपति और व्यापारिक नेता शामिल होंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक के जरिए भारत और यूरोप के बीच आर्थिक और व्यापारिक साझेदारी को नई दिशा मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक निवेश का बड़ा केंद्र बन रहा है और यूरोपीय देशों के साथ मजबूत आर्थिक संबंध दोनों पक्षों के लिए लाभकारी साबित होंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि उनकी यह यात्रा भारत और स्वीडन के रिश्तों को नई गति देने के साथ-साथ यूरोप के साथ भारत की रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूत करेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, रक्षा तकनीक, हरित ऊर्जा, डिजिटल इनोवेशन और निवेश के क्षेत्र में भारत और स्वीडन के बीच सहयोग आने वाले समय में और अधिक बढ़ सकता है।