नई दिल्ली। देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों ने भारतीय राजनीति की तस्वीर को एक बार फिर बदल दिया है। सबसे बड़ी खबर पश्चिम बंगाल से आई है, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। इसके साथ ही भाजपा ने राज्य में पहली बार सत्ता का रास्ता साफ कर लिया है।
चुनाव आयोग के रात 8 बजे तक जारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल की 293 सीटों में बहुमत के लिए 147 सीटों की जरूरत होती है, जबकि भाजपा 200 से अधिक सीटों पर जीत या बढ़त के साथ सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है। वहीं तृणमूल कांग्रेस काफी पीछे रह गई। वोट प्रतिशत के लिहाज से भी भाजपा ने करीब 45 प्रतिशत मत हासिल कर बढ़त बनाई है।
असम में भी भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की है। 126 सदस्यीय विधानसभा में गठबंधन को 100 से अधिक सीटों पर जीत या बढ़त मिली है। भाजपा को अकेले 80 से ज्यादा सीटें मिली हैं, जबकि उसके सहयोगी दलों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल यहां अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सके।
पुडुचेरी में भी एनडीए गठबंधन ने मजबूती से वापसी करते हुए बहुमत हासिल किया है। 30 सदस्यीय विधानसभा में गठबंधन ने 18 सीटों पर जीत दर्ज कर सरकार बनाने का दावा मजबूत किया है। इसमें एन.आर. कांग्रेस और भाजपा की साझेदारी निर्णायक साबित हुई।
दक्षिण भारत के दो प्रमुख राज्यों—तमिलनाडु और केरल—में सत्ता परिवर्तन देखने को मिला है। तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) ने चौंकाने वाला प्रदर्शन करते हुए सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सभी राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं। 234 सीटों वाली विधानसभा में टीवीके 100 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि द्रमुक और अन्नाद्रमुक जैसे पारंपरिक दल पीछे छूट गए हैं।
केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) 10 साल बाद सत्ता में वापसी करता दिख रहा है। 140 सदस्यीय विधानसभा में यूडीएफ 90 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। वहीं वामपंथी दलों का गठबंधन एलडीएफ काफी पीछे रह गया है। भाजपा ने भी यहां कुछ सीटों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है।
विधानसभा उपचुनावों के नतीजे भी भाजपा के पक्ष में रहे हैं। सात सीटों में से चार पर भाजपा ने जीत दर्ज की, जबकि एक सीट पर उसके सहयोगी दल ने सफलता हासिल की। महाराष्ट्र, गुजरात, नगालैंड और त्रिपुरा में भाजपा और उसके सहयोगियों ने जीत दर्ज की, जबकि कर्नाटक की दोनों सीटों पर कांग्रेस को सफलता मिली।
इन चुनाव नतीजों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में मतदाताओं का रुझान अलग-अलग है। जहां पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में भाजपा का दबदबा बढ़ा है, वहीं दक्षिण भारत में नए राजनीतिक विकल्प उभर रहे हैं।
कुल मिलाकर, इन चुनावों ने भारतीय राजनीति में नए समीकरण गढ़ दिए हैं। आने वाले समय में इन परिणामों का असर राष्ट्रीय राजनीति और आगामी चुनावों पर भी देखने को मिल सकता है।