रुड़की में दादी जानकी की स्मृति में भावपूर्ण कार्यक्रम, ब्रह्माकुमारीज परिवार ने दी श्रद्धांजलि

रुड़की।  ब्रह्माकुमारीज रुड़की सेवा केंद्र द्वारा संस्था की पूर्व प्रमुख एवं विश्वप्रसिद्ध राजयोगिनी दादी जानकी के स्मृति दिवस पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ब्रह्माकुमारीज से जुड़े भाई-बहनों और स्थानीय श्रद्धालुओं ने भाग लेकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्र संचालिका बीके गीता दीदी ने की। इस अवसर पर उन्होंने दादी जानकी के आध्यात्मिक योगदान, उनके सादगीपूर्ण जीवन और विश्वभर में किए गए रूहानी सेवा कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्हें परमात्मा शिव की सच्ची और समर्पित पुत्री बताया। उन्होंने कहा कि दादी जानकी ने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि आत्मिक शक्ति और सकारात्मक सोच से किसी भी परिस्थिति को बदला जा सकता है।

कार्यक्रम में बीके दीपिका ने दादी जानकी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे मनसा, वाचा और कर्मणा से पूर्णतः पवित्र और अनुकरणीय थीं। उनके जीवन के आदर्श आज भी लाखों लोगों को आध्यात्मिक मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

बीके सपना ने इस अवसर पर दादी जानकी के जीवन पर आधारित एक भावपूर्ण कविता प्रस्तुत की, जिसे सुनकर उपस्थित सभी लोग भावुक हो उठे। कार्यक्रम के दौरान दादी जानकी के प्रसिद्ध विचार—“मैं कौन, मेरा कौन”—को भी याद किया गया। वे अक्सर समझाया करती थीं कि हम सभी आत्मा हैं और हमारा वास्तविक संबंध केवल परमात्मा से है।

श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित सभी लोगों ने दादी जानकी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके बताए 16 संकल्पों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में बीके पारुल, गोपाल नारसन, रामकुमार, शिवकुमार, लक्ष्मण सिंह, कल्याण सिंह, पूनम शर्मा, रेखा, अमरेश, अंकित राठौड़, विनय गुप्ता, अनिल कुमार और यशपाल सिंह सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।

यह आयोजन दादी जानकी के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के साथ-साथ उनके आध्यात्मिक संदेशों को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम भी बना।

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