Dehradun Uttaranchal University का परिसर इन दिनों वैश्विक बौद्धिक विमर्श का केंद्र बना हुआ है। विश्वविद्यालय के Swami Vivekananda Auditorium में “वैदिक ज्ञान से तकनीकी प्रगति तक विकसित भारत @ 2047: मनोवैज्ञानिक उत्कृष्टता एवं सतत विकास हेतु एक वैश्विक दृष्टिकोण” विषय पर दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया।
इस संगोष्ठी का उद्देश्य प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीकी नवाचारों के समन्वय के माध्यम से सतत विकास की दिशा में नए विचार प्रस्तुत करना था। कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर आईकेएस और स्कूल ऑफ लिबरल आर्ट्स द्वारा ACIC Foundation के सहयोग से किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन और अतिथियों के पुष्प स्वागत के साथ हुई। इस अवसर पर दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का विमोचन भी किया गया, जिनमें सहायक प्रोफेसर Jageshwar Rai की पुस्तक *Psychology of the Beyond: An Indian Perspective of Life and Mental Well-Being विशेष आकर्षण का केंद्र रही।
विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति Rajesh Bahuguna ने अपने संबोधन में अंतःविषयक शोध की बढ़ती आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक चुनौतियों का समाधान बहुआयामी दृष्टिकोण से ही संभव है। वहीं कुलपति Dharm Buddhi ने वैदिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के समन्वय को भविष्य के विकास का आधार बताया।
संगोष्ठी में देश-विदेश के अनेक विद्वानों ने भाग लिया। ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से विद्वानों की सहभागिता ने कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। इस दौरान डॉ. गीता रानी, डॉ. ज्वलंत भावसार, प्रो. संजीत के मिश्रा, प्रो. प्रकाश जोशी सहित कई शिक्षाविदों ने भारतीय ज्ञान परंपरा, मनोविज्ञान और तकनीकी प्रगति पर अपने विचार साझा किए।
इस दो दिवसीय संगोष्ठी ने न केवल शैक्षणिक वातावरण को समृद्ध किया, बल्कि विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को वैश्विक दृष्टिकोण से समझने का महत्वपूर्ण मंच भी प्रदान किया।