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वन सिर्फ पर्यावरण नहीं, अर्थव्यवस्था और शांति के भी आधार—राष्ट्रीय कार्यशाला में मंत्री का बड़ा संदेश

देहरादून। भूपेंद्र यादव ने अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस 2026 के अवसर पर वन अनुसंधान संस्थान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। यह कार्यशाला भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद के तत्वावधान में आयोजित की गई।

इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय वन दिवस की थीम **“वन और अर्थव्यवस्थाएँ”** रखी गई है, जिसका उद्देश्य यह बताना है कि वन न केवल पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हैं, बल्कि लाखों लोगों की आजीविका और देश की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर ही मानव अस्तित्व संभव है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वन संरक्षण केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पूरे पारिस्थितिकी तंत्र—जैव विविधता, वन्यजीव और प्राकृतिक संसाधनों—का संरक्षण शामिल है।

मंत्री ने विभिन्न विभागों और संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि सतत वन प्रबंधन के लिए एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना समय की मांग है। उन्होंने ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम और कार्बन क्रेडिट जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये न केवल पर्यावरण संरक्षण में सहायक हैं, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए आर्थिक अवसर भी पैदा करते हैं।

कार्यशाला के दौरान वन आधारित जैव-उत्पादों के व्यावसायीकरण, सतत वन प्रबंधन, नीतिगत ढांचे, उद्यमिता और जैव-अर्थव्यवस्था में नवाचार की भूमिका जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया। तकनीकी सत्रों में कृषि-वानिकी, गैर-काष्ठ वन उत्पाद, इंजीनियर्ड काष्ठ, वन उद्योग, कार्बन बाजार, वन्यजीव संरक्षण और इको-टूरिज्म जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई।

इस कार्यशाला का उद्देश्य वन संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देना, मूल्य-वर्धित उत्पादों का विकास करना और स्थानीय समुदायों की आजीविका को सुदृढ़ करना है, ताकि प्राकृतिक वनों पर दबाव कम किया जा सके और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखा जा सके।

 

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