चंपावत। महिलाओं की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के उद्देश्य से National Commission for Women के आह्वान पर उत्तराखंड में 9 से 13 मार्च तक विशेष प्रदेशव्यापी अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में जनपद चंपावत में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष Kusum Kandwal और आयोग की सदस्य Kiran Devi की अध्यक्षता में महिला जनसुनवाई का आयोजन किया गया।
जनसुनवाई के दौरान कुल 18 महिलाओं ने अपनी शिकायतें आयोग के समक्ष प्रस्तुत कीं। इनमें से 14 मामलों का मौके पर ही समाधान कर दिया गया, जबकि पारिवारिक विवाद से जुड़े 4 जटिल मामलों को आगे की कार्रवाई के लिए आयोग मुख्यालय भेजा गया है।
इस अवसर पर अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने बताया कि यह पांच दिवसीय विशेष अभियान पूरे प्रदेश में युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। इसके तहत आयोग की उपाध्यक्ष, सदस्य और वे स्वयं अलग-अलग जिलों में जाकर महिला जनसुनवाई कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पीड़ित महिला न्याय से वंचित न रहे।
उन्होंने कहा कि कई महिलाएं भौगोलिक दूरी या आर्थिक कारणों से देहरादून स्थित आयोग मुख्यालय तक नहीं पहुंच पातीं। ऐसे में आयोग स्वयं उनके द्वार तक पहुंचकर उनकी समस्याओं को सुन रहा है और उनका समाधान करने का प्रयास कर रहा है।
जनसुनवाई के दौरान अध्यक्ष ने संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि सभी सरकारी और निजी संस्थानों में अनिवार्य रूप से आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन किया जाए। इससे कार्यस्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाले किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार या उत्पीड़न के मामलों में तुरंत कार्रवाई संभव हो सकेगी।
उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि विभागीय स्तर पर नियमित कार्यशालाएं और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, ताकि महिलाओं को उनके अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े कानूनों की जानकारी मिल सके।
कुसुम कंडवाल ने विशेष रूप से पुलिस प्रशासन को निर्देश देते हुए कहा कि थानों में आने वाली महिलाओं के साथ पुलिस का व्यवहार संवेदनशील और सम्मानजनक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस को पीड़ित महिलाओं की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर सुनना चाहिए, उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए और जांच के बाद रिपोर्ट आयोग को भेजनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए सुरक्षित वातावरण बनाना केवल सरकार ही नहीं बल्कि शासन-प्रशासन और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।