देशभर में मानसून के सक्रिय होते ही कई राज्यों में भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। खासकर पहाड़ी राज्यों में लगातार हो रही बारिश के कारण फ्लैश फ्लड (अचानक आने वाली बाढ़) का खतरा तेजी से बढ़ गया है। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में हालात बेहद गंभीर हैं, जहां तेज बारिश के बाद आई फ्लैश फ्लड ने भारी तबाही मचाई है। कई सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं और शिमला को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग भी कट गया है। इलाके में भूस्खलन का खतरा लगातार बना हुआ है।
किन्नौर, जो तिब्बत सीमा के निकट स्थित है, वहां अचानक बढ़े जलस्तर ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कई स्थानों पर मलबा और पानी सड़क पर आ जाने से यातायात बाधित हो गया है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और राहत एवं बचाव कार्य जारी हैं।
दरअसल, फ्लैश फ्लड सामान्य बाढ़ से पूरी तरह अलग होती है। यह बहुत कम समय में अचानक आती है और तेज बारिश, बादल फटने या पहाड़ी इलाकों में पानी के तेजी से नीचे आने के कारण पैदा होती है। पहाड़ों की ढलान अधिक होने की वजह से बारिश का पानी तेजी से नदियों और नालों में पहुंचता है, जिससे कुछ ही मिनटों में जलस्तर खतरनाक रूप से बढ़ जाता है। यही कारण है कि फ्लैश फ्लड में लोगों को संभलने या सुरक्षित स्थान पर पहुंचने का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता।
विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन और लगातार हो रही अत्यधिक बारिश की घटनाओं के चलते फ्लैश फ्लड का खतरा पहले की तुलना में बढ़ा है। इसी को देखते हुए मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के कई राज्यों के लिए भारी बारिश और फ्लैश फ्लड का अलर्ट जारी किया है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि खराब मौसम के दौरान नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहें तथा मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को भी अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।