- धामी की मंत्रिमंडल विस्तार की खबरों पर कांग्रेस का पलटवार
- चेहरे बदलने से नहीं, जनता के मुद्दों से बदलेगी किस्मत
- बेरोजगारी और पलायन जैसे बुनियादी मुद्दों पर सरकार विफल
-ममता सिंह, देहरादून।
सत्ता के गलियारों में मची इस भारी हलचल के बीच कांग्रेस ने भी अपनी बिसात बिछा दी है और भाजपा की इस राजनीतिक ‘सर्जरी’ पर चौतरफा वार शुरू कर दिया है। धामी सरकार के इस बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर विपक्ष का रुख बेहद आक्रामक नजर आ रहा है । नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभालते हुए स्पष्ट किया है कि केवल चेहरे बदलने से सरकार की किस्मत और राज्य की सूरत नहीं बदलने वाली। कांग्रेस का सीधा आरोप है कि पिछले चार सालों में बेरोजगारी, बेतहाशा महंगाई और पहाड़ से निरंतर होते पलायन जैसे बुनियादी मुद्दों पर विफल रही भाजपा सरकार अब चुनाव करीब आते देख मंत्रियों की फौज खड़ी कर रही है। विपक्ष इसे जनता की सेवा के बजाय केवल सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ डालने वाला कदम करार दे रहा है। संसदीय गरिमा का प्रश्न उठाते हुए कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि हालिया बजट सत्र में गंभीर चर्चाओं से भागने वाली सरकार अब कैबिनेट विस्तार के जरिए केवल अपने नाराज विधायकों को संतुष्ट करने का ‘प्रसाद’ बांट रही है।
भाजपा के ‘मिशन 2027’ की काट के लिए कांग्रेस ने अपना ‘ब्लूप्रिंट 2027’ पूरी तरह तैयार कर लिया है, जिसके तहत राज्य को 8 रणनीतिक सांगठनिक जोनों में विभाजित किया गया है। इन जोनों की जिम्मेदारी हरीश रावत, यशपाल आर्य और प्रीतम सिंह जैसे कद्दावर नेताओं को सौंपी गई है ताकि बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा फूंकी जा सके। इसी कड़ी में कांग्रेस आगामी दिनों में धामी सरकार के खिलाफ एक व्यापक ‘जन-आरोप पत्र’ यानी चार्जशीट जारी करने की तैयारी में है। इस चार्जशीट में अंकिता भंडारी मामले में ‘वीआईपी’ का नाम छिपाने, भर्ती घोटालों की लंबी फेहरिस्त और आपदा प्रबंधन में बरती गई कथित लापरवाही को प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।
जमीनी स्तर पर सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस ‘गांव बचाओ, उत्तराखंड बचाओ’ सत्याग्रह यात्रा शुरू करने जा रही है, जिसका उद्देश्य जनता के बीच यह संदेश देना है कि जहां भाजपा केवल ‘कुर्सी बचाने’ की राजनीति कर रही है, वहीं कांग्रेस जनता के हकों की लड़ाई लड़ रही है। पार्टी के भीतर की गुटबाजी को थामने के लिए प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने सख्त अनुशासन का चाबुक चलाया है और सभी दिग्गजों को एक मंच पर एकजुट दिखने के निर्देश दिए हैं। बैठकों से दूरी बनाने वाले नेताओं के साथ अब ‘वन टू वन’ संवाद के जरिए गिले-शिकवे दूर किए जा रहे हैं। कुल मिलाकर, उत्तराखंड की राजनीति अब एक ऐसे मोड़ पर है जहां एक तरफ सरकार नए मंत्रियों के जरिए सत्ता विरोधी लहर को थामने की कोशिश में है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस इसे सरकार की ‘अंतिम छटपटाहट’ बताकर भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही। राज्य में अब शह और मात का यह खेल पूरी तरह से 2027 के ध्रुवीकरण की ओर बढ़ चला है।