नवरात्र में मंत्रिमंडल विस्तार के संकेत! धामी की ‘फाइट-5’ टीम में कौन-कौन शामिल?
मिशन 2027 की तैयारी तेज, 5 नए मंत्री और 24 पदों पर नियुक्ति की चर्चा ने बढ़ाई सियासी हलचल
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर हो रही है। सूत्रों के अनुसार, नवरात्र के दूसरे दिन यानी 20 मार्च को राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जा सकता है।

हालांकि आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन सत्ता और संगठन दोनों स्तरों पर तैयारियों की चर्चा ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है।
वर्तमान में राज्य मंत्रिमंडल में पांच पद रिक्त हैं और माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री इन सभी पदों को भरकर आगामी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले अपनी टीम को मजबूत करना चाहते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विस्तार केवल प्रशासनिक आवश्यकता नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा भी हो सकता है।
क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर जोर
सूत्रों के मुताबिक मंत्रिमंडल विस्तार में गढ़वाल और कुमाऊं दोनों मंडलों के साथ-साथ जातीय और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखा गया है। संभावित नामों में विकासनगर से विधायक मुन्ना सिंह चौहान, देवप्रयाग से विनोद कंडारी और रुद्रपुर से शिव अरोड़ा का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है।
कुमाऊं क्षेत्र से महिला प्रतिनिधित्व के लिए केदारनाथ की पूर्व विधायक आशा नौटियाल और नैनीताल से विधायक सरिता आर्य में से किसी एक को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। वहीं अनुसूचित जाति वर्ग के प्रतिनिधित्व के लिए राजपुर रोड से विधायक खजान दास का नाम चर्चा में है।
मुख्यमंत्री पर विभागों का बढ़ता बोझ
वर्तमान में मुख्यमंत्री धामी के पास गृह, वित्त, राजस्व और सूचना जैसे 35 से अधिक विभाग हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद इन विभागों का पुनर्वितरण होगा, जिससे मुख्यमंत्री प्रशासनिक जिम्मेदारियों से कुछ हद तक मुक्त होकर संगठन और चुनावी रणनीति पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। भाजपा नेतृत्व आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए राज्य स्तर पर सक्रियता बढ़ाने के पक्ष में है।
‘मिशन 2027’ की रणनीति
भाजपा के भीतर यह चर्चा भी तेज है कि यह विस्तार आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी चाहती है कि क्षेत्रीय नेताओं को जिम्मेदारी देकर संगठनात्मक असंतोष को कम किया जाए और कार्यकर्ताओं में उत्साह बनाए रखा जाए। इसी क्रम में खबर है कि लगभग 24 निष्ठावान कार्यकर्ताओं को विभिन्न आयोगों और निगमों में दायित्व सौंपे जाने की भी तैयारी है।
संभावित मंत्रियों का राजनीतिक कद
मुन्ना सिंह चौहान को उत्तराखंड विधानसभा के अनुभवी और विधायी मामलों के जानकार नेताओं में गिना जाता है। पछवादून क्षेत्र में उनका मजबूत जनाधार है, जिससे पार्टी को पश्चिमी क्षेत्र में मजबूती मिल सकती है।
विनोद कंडारी को युवा और ऊर्जावान चेहरा माना जाता है। मुख्यमंत्री के करीबी माने जाने वाले कंडारी को युवा मतदाताओं के बीच लोकप्रिय नेता के रूप में देखा जाता है, जिससे गढ़वाल क्षेत्र में भाजपा की पकड़ मजबूत हो सकती है।
शिव अरोड़ा तराई और मैदानी इलाकों में भाजपा का मजबूत चेहरा हैं। व्यापारी वर्ग और पंजाबी समुदाय के बीच उनकी अच्छी पकड़ बताई जाती है, जो पार्टी के लिए महत्वपूर्ण चुनावी समीकरण बन सकता है।
महिला प्रतिनिधित्व के तहत आशा नौटियाल या सरिता आर्य में से किसी एक को मंत्री बनाए जाने की चर्चा है। इससे महिला मतदाताओं के बीच सकारात्मक संदेश देने की रणनीति मानी जा रही है।
खजान दास लंबे समय से मंत्री पद की दौड़ में बताए जाते रहे हैं। राजधानी क्षेत्र से उनका जुड़ाव और संगठन में सक्रिय भूमिका उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है।
नवरात्र और राजनीतिक संकेत
मुख्यमंत्री धामी ने नवरात्र के पहले दिन अपने आवास पर हवन-पूजन कर प्रदेश की समृद्धि की कामना की। राजनीतिक हलकों में इसे नई शुरुआत और बड़े निर्णयों से जोड़कर देखा जा रहा है। यदि मंत्रिमंडल विस्तार नवरात्र के दौरान होता है, तो यह धार्मिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से प्रतीकात्मक महत्व रखेगा।
भाजपा की आंतरिक एकजुटता पर असर
विश्लेषकों का मानना है कि मंत्रिमंडल विस्तार से भाजपा के भीतर लंबे समय से चल रही असंतुष्टि को संतुलित करने का प्रयास किया जा सकता है। पार्टी नेतृत्व यह संदेश देना चाहता है कि कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के योगदान को उचित सम्मान दिया जाएगा।
यदि यह विस्तार तय समय पर होता है, तो यह स्पष्ट संकेत होगा कि भाजपा अब पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुकी है और संगठन तथा सरकार दोनों स्तरों पर रणनीतिक बदलाव किए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में आधिकारिक घोषणा के साथ ही उत्तराखंड की राजनीति में नया समीकरण देखने को मिल सकता है।