लोकसभा और विधानसभाओं में अक्सर अलग-अलग विचारधाराओं वाले दलों के जनप्रतिनिधियों के बीच तीखे मतभेद देखने को मिलते हैं। लेकिन जब बात वेतन, भत्तों और सुविधाओं में बढ़ोतरी की आती है, तो कई बार सत्ता और विपक्ष एक सुर में नजर आते हैं। ऐसे माहौल में दो सांसदों का अपने वेतन से इनकार करना एक अलग और प्रेरक उदाहरण के रूप में सामने आया है।
Naveen Jindal और Bimol Akoijam ने सांसद के रूप में मिलने वाले वेतन को स्वीकार न करने का फैसला किया है। एक आरटीआई के जवाब में Lok Sabha Secretariat ने बताया कि कुरुक्षेत्र से सांसद नवीन जिंदल ने न केवल अपना वेतन और भत्ते लेने से इनकार किया है, बल्कि उनसे जुड़ी कई अन्य सुविधाओं को भी अस्वीकार कर दिया है। वहीं मणिपुर से कांग्रेस सांसद डॉ. बिमोल अकोईजाम ने भी वेतन न लेने का निर्णय लिया है।
नवीन जिंदल देश के प्रसिद्ध उद्योगपति होने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज और कुशल घुड़सवार भी रहे हैं। वे उस समय चर्चा में आए थे जब उन्होंने हर भारतीय को तिरंगा फहराने का अधिकार दिलाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी। वर्ष 1995 में उन्होंने Delhi High Court में याचिका दायर कर तर्क दिया था कि राष्ट्रीय ध्वज फहराना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। बाद में Supreme Court of India ने भी उनके पक्ष में फैसला दिया, जिसके बाद 23 जनवरी 2004 से हर भारतीय को तिरंगा फहराने का अधिकार मिला। उन्होंने वर्ष 2003 में Flag Foundation of India की स्थापना भी की थी।
दूसरी ओर डॉ. बिमोल अकोईजाम की पृष्ठभूमि बिल्कुल अलग है। वे पहले Jawaharlal Nehru University में एसोसिएट प्रोफेसर रह चुके हैं। वे एक शिक्षाविद, मनोवैज्ञानिक और फिल्म निर्माता भी हैं। जहां नवीन जिंदल की घोषित संपत्ति हजारों करोड़ रुपये है, वहीं डॉ. बिमोल की संपत्ति करीब 97 लाख रुपये बताई जाती है।
दिलचस्प बात यह है कि 18वीं लोकसभा में लगभग 93 प्रतिशत सांसद करोड़पति हैं और बड़ी संख्या में सांसदों की संपत्ति दस करोड़ रुपये से अधिक है। ऐसे माहौल में इन दोनों सांसदों का वेतन त्यागने का फैसला जनसेवा की भावना को मजबूत करने वाली पहल माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक रूप से सक्षम जनप्रतिनिधियों को इस तरह की पहल से प्रेरणा लेनी चाहिए, ताकि राजनीति में सेवा और नैतिकता की भावना और मजबूत हो सके।