देहरादून में आस्था का महासागर: 94 फीट ऊंचे श्री झण्डे साहिब के आरोहण का दिव्य नजारा

देहरादून।  रविवार को दून नगरी आस्था, श्रद्धा और भक्ति के रंग में पूरी तरह सराबोर नजर आई। पवित्र श्री दरबार साहिब परिसर में आयोजित ऐतिहासिक श्री झण्डे जी मेला के दौरान लाखों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर गुरु भक्ति का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया। अवसर था श्री गुरु राम राय जी महाराज के जन्मोत्सव का, जब परंपरागत विधि-विधान के साथ पवित्र श्री झण्डा साहिब का भव्य आरोहण किया गया।

जैसे ही दरबार साहिब परिसर में श्रद्धालुओं की जुबान पर भक्ति गीत “झण्डा चढ़या चढ़या ए देहरादून…” गूंजा, पूरा वातावरण गुरु भक्ति से भर उठा। संगतें ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमती नजर आईं और जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।

ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने लाखों श्रद्धालु

शाम 4 बजकर 12 मिनट पर 94 फीट ऊंचे पवित्र श्री झण्डे जी का आरोहण पूर्ण हुआ। इस दौरान हजारों नहीं बल्कि लाखों श्रद्धालु इस दिव्य क्षण के साक्षी बने। जैसे ही झण्डा साहिब पूरी ऊंचाई पर स्थापित हुआ, “जय श्री गुरु राम राय जी महाराज” के गगनभेदी जयकारों से पूरा देहरादून गूंज उठा।

दरबार साहिब के सज्जादे गद्दी नशीन श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज के संदेश के बाद झण्डा साहिब के आरोहण की प्रक्रिया शुरू हुई। यह क्षण श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत भावुक और पवित्र माना जाता है। जैसे ही ध्वज अपनी पूर्ण ऊंचाई पर पहुंचा, संगतों ने गुरु महाराज के जयकारों के साथ इस ऐतिहासिक परंपरा का स्वागत किया। इसी के साथ देहरादून के प्रसिद्ध **श्री झण्डे जी मेले** का विधिवत शुभारंभ भी हो गया।

सुबह से उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

रविवार तड़के सूर्योदय से पहले ही **देहरादून** स्थित दरबार साहिब और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी थी। उत्तराखंड के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालु गुरु महाराज के दर्शन के लिए लंबी कतारों में खड़े दिखाई दिए।

पूरे परिसर में श्रद्धालुओं की इतनी भीड़ थी कि तिल रखने तक की जगह नहीं थी। हर कोई पवित्र झण्डे जी के समक्ष मत्था टेकने और गुरु महाराज का आशीर्वाद लेने को आतुर दिखाई दिया।

दूध, घी, शहद और गंगाजल से हुआ अभिषेक

सुबह 7 बजे से विशेष पूजा-अर्चना की शुरुआत हुई। इसके बाद सुबह लगभग 8:30 बजे श्रद्धालुओं ने पवित्र ध्वज दंड को उतारकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। संगतों ने दूध, घी, शहद, गंगाजल और पंचगव्य से पवित्र ध्वज का अभिषेक किया।

इसके बाद 94 फीट ऊंचे ध्वज दंड पर सादे और शनील के गिलाफ चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हुई। इस दौरान एक अनूठी परंपरा निभाई जाती है—पूरी प्रक्रिया के दौरान पवित्र झण्डे जी को जमीन पर नहीं रखा जाता। संगतें अपने हाथों पर इसे थामे रखती हैं, जो उनकी आस्था और समर्पण का प्रतीक है।

दर्शनी गिलाफ चढ़ते ही उमड़ी श्रद्धा

दोपहर लगभग 1:30 बजे जैसे ही दर्शनी गिलाफ चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हुई, श्रद्धालुओं में उत्साह और बढ़ गया। हजारों भक्त उस पवित्र गिलाफ को स्पर्श कर पुण्य अर्जित करने के लिए आगे बढ़ते दिखाई दिए।

गुरु भक्ति से भरे इस वातावरण में भजन-कीर्तन और जयकारों की गूंज लगातार सुनाई देती रही। श्रद्धालुओं के चेहरों पर भक्ति और आनंद का अद्भुत संगम देखने को मिला।

गुरु की कृपा से जगमगाई द्रोणनगरी

नए मखमली वस्त्र और सुनहरे गोटों से सुसज्जित झण्डा साहिब का आरोहण होते ही पूरा परिसर भक्तों के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने लकड़ी की विशेष कैंचियों की सहायता से झण्डे को ऊंचाई तक पहुंचाने में सहयोग दिया।

यह दृश्य गुरु प्रेम, श्रद्धा और सामूहिक आस्था की अद्भुत मिसाल बन गया। हजारों श्रद्धालु इस पवित्र परंपरा का हिस्सा बनकर खुद को धन्य महसूस कर रहे थे।

श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज का संदेश

झण्डा साहिब के आरोहण के बाद **श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज** ने देश और प्रदेशवासियों को **श्री झण्डा जी महोत्सव** की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रेम, भाईचारे और सद्भाव का संदेश देने वाला महोत्सव है।

उन्होंने कहा कि झण्डे जी के समक्ष शीश नवाने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही कारण है कि देश-विदेश से संगतें हर वर्ष इस पावन अवसर की प्रतीक्षा करती हैं।

## बाज के दर्शन को माना गया दिव्य संकेत

झण्डा साहिब के आरोहण के बाद एक बाज ने झण्डे जी की परिक्रमा की। श्रद्धालु इसे गुरु महाराज की सूक्ष्म दिव्य उपस्थिति का प्रतीक मानते हैं। हर वर्ष इस अद्भुत दृश्य को देख श्रद्धालुओं की आस्था और अधिक मजबूत हो जाती है।

इस बार भी जब बाज ने झण्डे के चारों ओर चक्कर लगाया, तो संगतों में उत्साह और श्रद्धा का अद्भुत वातावरण बन गया।

एलईडी स्क्रीन और सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण

इस बार मेले के आयोजन को अधिक भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया गया। आयोजन स्थल पर पांच बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाई गईं, जिनके माध्यम से दूर खड़े श्रद्धालु भी झण्डा साहिब के आरोहण का दृश्य देख सके।

इसके साथ ही फेसबुक और यूट्यूब के माध्यम से कार्यक्रम का लाइव प्रसारण भी किया गया। ड्रोन कैमरों से की गई भव्य कवरेज श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही।

देश-विदेश से पहुंची संगतें

इस पावन अवसर पर उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से संगतें यहां पहुंचीं। विदेशों से आए श्रद्धालुओं ने भी इस ऐतिहासिक परंपरा के दर्शन कर खुद को धन्य महसूस किया।

भक्त भजन-कीर्तन करते हुए और ढोल की थाप पर झूमते हुए गुरु महाराज की महिमा का गुणगान करते नजर आए।

पवित्र सरोवर में लगाई आस्था की डुबकी

श्रद्धालुओं ने दरबार साहिब परिसर में स्थित पवित्र सरोवर में स्नान कर गुरु महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया। सुबह से ही यहां श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं और हर कोई इस पावन स्नान का हिस्सा बनने को उत्सुक दिखाई दिया।

आयोजन समिति ने जताया आभार

**श्री झण्डा जी मेला आयोजन समिति** ने मेले के सफल आयोजन के लिए पुलिस प्रशासन, मीडिया और दूनवासियों का आभार व्यक्त किया। समिति के मेला अधिकारी **विजय गुलाटी** ने कहा कि सभी के सहयोग से यह भव्य आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

 

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