रानीखेत में चीर बंधन के साथ रंगभरी होली की शुरुआत, पंचेश्वर महादेव मंदिर में गूंजे पारंपरिक होली गीत
रानीखेत। पर्यटक नगरी रानीखेत और आसपास के क्षेत्रों में चीर बंधन के साथ पारंपरिक रंगभरी होली का आगाज़ हो गया है। नगर में होल्यारों की टोलियों ने पारंपरिक होली गायन कर माहौल को भक्तिमय और उत्सवी बना दिया। लोगों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर शुभकामनाएं दीं, वहीं घरों में महिला और पुरुषों की होली बैठकों का दौर भी शुरू हो गया है।
शिव मंदिर समिति के तत्वावधान में नगर के प्रसिद्ध पंचेश्वर महादेव मंदिर में चीर बंधन कार्यक्रम मुख्य पुजारी हेम चंद्र पंत द्वारा विधिवत संपन्न कराया गया। इसके साथ ही रंगभरी खड़ी होली की शुरुआत हुई। होल्यारों ने ‘कैले बॉधी चीर’ और ‘सिद्धि को दाता विघ्न विनाशन’ सहित कई पारंपरिक होलियों का गायन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
मंदिर के प्रबंधक रमेश अधिकारी ने बताया कि 27 फरवरी से तीन मार्च तक प्रतिदिन रात्रि सात बजे से खड़ी होली का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने नगरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की। इस अवसर पर समिति अध्यक्ष कैलाश पांडे, जीवन तिवारी, केडी वर्मा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
वहीं जालली क्षेत्र के भटकोट ग्राम स्थित देवाथान मंदिर में भी चीर बंधन का आयोजन हुआ। ग्राम प्रधान गिरीजा नंदन पांडे यजमान रहे, जबकि पं. गिरीश चंद्र पांडे ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम संपन्न कराया। यहां भी होल्यारों ने भगवान गणपति और अन्य देवी-देवताओं की होलियों का गायन किया।
वरिष्ठ होल्यार शास्त्री प्रकाश चंद्र पांडे ने जानकारी दी कि तीन मार्च की सायं होलिका दहन होगा, चार मार्च को छलड़ी और अगले दिन टीका कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। पर्व के तहत 28 फरवरी को होली कुरेगैर और खड़कधार, एक मार्च को गैरखोला और डाना, तथा दो मार्च को शिवालय, सीमल्टा और जालली बाजार में पहुंचेगी।
रानीखेत क्षेत्र में पारंपरिक होली उत्सव पूरे उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है।