राजधानी में दिनदहाड़े हत्या और अपहरण की कोशिश, क्या देहरादून महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं?

देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में लगातार सामने आ रही आपराधिक घटनाओं ने प्रदेश की कानून व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। प्रशासनिक और सुरक्षा की दृष्टि से अति-महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस शहर में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि वे दिनदहाड़े जघन्य वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

राजधानी वही है जहां मुख्यमंत्री, राज्यपाल, वरिष्ठ अधिकारी और पुलिस के शीर्ष अफसरों के कार्यालय एवं आवास स्थित हैं, लेकिन इसके बावजूद स्कूल के बाहर छात्राओं के अपहरण के प्रयास और कार्यरत महिलाओं की सरेआम हत्या जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। इन घटनाओं ने आमजन में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है।

उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने इन घटनाओं को लेकर धामी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बीते मात्र पांच दिनों में देहरादून में तीन कामकाजी युवतियों की खुलेआम हत्या इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि सरकार की तथाकथित “धाकड़ कानून व्यवस्था” पूरी तरह चरमरा चुकी है। अपराधियों को न पुलिस का डर है और न ही कानून का भय।

गरिमा दसौनी ने कहा कि स्कूल के बाहर छात्रा के अपहरण की कोशिश ने यह साबित कर दिया है कि अब बेटियां शैक्षणिक परिसरों के आसपास भी सुरक्षित नहीं हैं। जब राजधानी की यह हालत है, तो प्रदेश के दूरस्थ इलाकों की स्थिति की कल्पना ही डराने वाली है।

उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार हेम भट्ट पर हुए हमले का जिक्र करते हुए कहा कि धामी सरकार के कार्यकाल में लोकतंत्र का चौथा स्तंभ भी सुरक्षित नहीं है। यह घटनाएं सरकार की विफलता और समाज में नफरत की राजनीति का परिणाम हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि महिला सुरक्षा के नाम पर सरकार केवल प्रचार और विज्ञापनों तक सीमित है, जबकि जमीनी सच्चाई यह है कि महिलाएं और छात्राएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। सरकार की चुप्पी अपराधियों को संरक्षण देने जैसा संदेश दे रही है।

कांग्रेस ने मांग की है कि महिला अपराधों की उच्चस्तरीय और समयबद्ध जांच हो, स्कूलों-कॉलेजों और कार्यस्थलों के आसपास सुरक्षा बढ़ाई जाए तथा महिला अपराधों में शामिल आरोपियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से कड़ी सजा दी जाए। पार्टी ने साफ कहा कि महिलाओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा और सरकार की नाकामी के खिलाफ सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रहेगा।

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