मणिपुर: शपथ ग्रहण पर टिकी निगाहें

10 या 11 फरवरी को इंफाल के राजभवन में आयोजित किया जाएगा कार्यक्रम!

राष्ट्रपति शासन की अवधि 12 फरवरी, 2026 को हो रही समाप्त

समारोह में केंद्र के बड़े नेता और पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्री हो सकते हैं शामिल!

ममता सिंह, नई दिल्ली।

मणिपुर के नए मुख्यमंत्री के रूप में युमनाम खेमचंद सिंह के नाम पर मुहर लगने के बाद अब सबकी निगाहें शपथ ग्रहण समारोह और राज्य के नए प्रशासनिक ढांचे पर टिकी हैं। चूंकि राज्य में राष्ट्रपति शासन की अवधि 12 फरवरी, 2026 को समाप्त हो रही है, इसलिए पूरी संभावना है कि शपथ ग्रहण समारोह इससे एक या दो दिन पहले, यानी 10 या 11 फरवरी के आसपास इंफाल के राजभवन में आयोजित किया जाएगा। इस समारोह में केंद्र की ओर से बड़े नेताओं और पूर्वोत्तर के अन्य मुख्यमंत्रियों के शामिल होने की उम्मीद है, जो राज्य में लोकतांत्रिक व्यवस्था की वापसी का एक बड़ा संदेश होगा।

इस नई सरकार में सबसे प्रभावशाली और रणनीतिक भूमिका उपमुख्यमंत्री की होने वाली है, जिसके लिए कुकी समुदाय की कद्दावर नेता नेमचा किपगेन का नाम सबसे आगे चल रहा है। किपगेन को यह जिम्मेदारी देना केवल एक पद का बंटवारा नहीं, बल्कि मैतेई और कुकी समुदायों के बीच संवाद की एक मजबूत कड़ी स्थापित करने की कोशिश है। उपमुख्यमंत्री के रूप में उनकी भूमिका राज्य के पहाड़ी और घाटी क्षेत्रों के बीच विश्वास बहाली और विस्थापितों के पुनर्वास कार्यों की निगरानी करने की होगी। साथ ही, वे नई कैबिनेट में कुकी-जो समुदाय की आवाज़ बनकर राज्य में समावेशी राजनीति को बढ़ावा देंगी, जिससे मणिपुर में लंबे समय से जारी अस्थिरता को समाप्त करने में मदद मिल सके।

अनुशासित और साफ-सुथरी छवि वाले नेता हैं वाई. खेमचंद

मणिपुर की कमान संभालने जा रहे युमनाम खेमचंद सिंह को इस पद के लिए चुनने के पीछे कई ठोस रणनीतिक कारण रहे हैं। मैतेई समुदाय से आने वाले खेमचंद सिंह न केवल पांच साल विधानसभा अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री के रूप में प्रशासनिक अनुभव रखते हैं, बल्कि मार्शल आर्ट्स में ब्लैक बेल्ट धारक होने के साथ-साथ एक अनुशासित और साफ-सुथरी छवि वाले नेता भी माने जाते हैं। उनके चयन की सबसे महत्वपूर्ण वजह उनकी सर्व-स्वीकार्यता है; जहाँ पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के कार्यकाल में कुकी समुदाय के साथ संवाद की कमी देखी गई, वहीं खेमचंद सिंह ने राहत शिविरों का दौरा कर और शांति की खुली अपील कर कुकी और नागा समुदायों के बीच भी अपनी विश्वसनीयता बनाई है।

राजनीतिक रूप से उन्हें भाजपा के भीतर आरएसएस का एक भरोसेमंद और निष्ठावान चेहरा माना जाता है, जो उन्हें केंद्रीय नेतृत्व की पहली पसंद बनाता है। बीरेन सिंह के पुराने सहयोगी से उनके आलोचक बनने तक का उनका सफर उन्हें एक ‘लिबरल मैतेई’ चेहरे के रूप में स्थापित करता है, जो वर्तमान तनावपूर्ण परिस्थितियों में संतुलन बनाने में सक्षम हैं। 2013 में भाजपा से जुड़ने और 2017 से सिंगजामेई सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले खेमचंद के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती राज्य में स्थायी शांति बहाल करना है, जिसे उनके राजनीतिक करियर की अब तक की सबसे कठिन ‘अग्निपरीक्षा’ माना जा रहा है।

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