तरुण चुघ बनाए गए केंद्रीय पर्यवेक्षक, शाम तक क्लियर होगी स्थिति
सत्यव्रत सिंह, बिस्वजीत सिंह, खेमचंद सिंह आदि के नामों की चर्चा
ममता सिंह, नई दिल्ली।
नई दिल्ली में मणिपुर को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मणिपुर की राजनीति में नेतृत्व को लेकर चल रही इस रस्साकशी के बीच, भाजपा संसदीय बोर्ड द्वारा तरुण चुघ की केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्ति ने साफ कर दिया है कि अगले 48 घंटे के भीतर बीते 3 मई 2023 से अशांत मणिपुर में राष्ट्रपति शासन हटाकर नई सरकार बनाने की तैयारी है! कल दिनभर चली बैठकों में संभावित मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर भी मंत्रणा हुई। वैसे रेस में मणिपुर विधानसभा के वर्तमान अध्यक्ष थोकचोम सत्यव्रत सिंह, भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बिस्वजीत सिंह, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और आरएसएस के करीबी माने जाने वाले खेमचंद सिंह के नामों की चर्चा है लेकिन मणिपुर के राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री और कांग्रेस से भाजपा में आए गोविंददास कोंथौजम पर दांव लगाया जा सकता है। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की दावेदारी को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। उनकी पकड़ अब भी विधायकों के एक बड़े गुट पर है।
मालूम हो कि राज्य में 12 फरवरी को राष्ट्रपति शासन की अवधि समाप्त हो रही है, जिससे पहले केंद्र सरकार एक निर्वाचित सरकार की बहाली चाहती है। इसी सिलसिले में गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा नेतृत्व ने मणिपुर के एनडीए विधायकों के साथ दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक की है। इस राजनीतिक प्रक्रिया को अमली जामा पहनाने के लिए भाजपा ने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। उनकी मुख्य जिम्मेदारी विधायक दल के नए नेता का चुनाव सुनिश्चित करना है। कल हुई शुरुआती चर्चाओं के बाद आज, 3 फरवरी को दोपहर 3 बजे भाजपा मुख्यालय में महत्वपूर्ण बैठक होनी है, जिसमें नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगने की संभावना है। वैसे चर्चा यह भी है कि समावेशिता का संदेश देने के लिए भाजपा किसी कुकी विधायक को उपमुख्यमंत्री का पद देने पर विचार कर सकती है ताकि राज्य के दोनों प्रमुख समुदायों के बीच सत्ता का संतुलन बनाया जा सके।
बहरहाल, आज शाम को होने वाली बैठक में काफी कुछ साफ हो जाएगा। लेकिन सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती मैतेई और कुकी समुदायों के बीच विश्वास बहाली और एक ऐसा नेतृत्व देने की है जो दोनों पक्षों को स्वीकार्य हो। कुकी विधायक जहां सुरक्षा और राजनीतिक गारंटी की मांग कर रहे हैं, वहीं घाटी के विधायक जल्द प्रशासनिक स्थिरता चाहते हैं। पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह समेत राज्य के कई दिग्गज नेता दिल्ली में मौजूद हैं। आज होने वाली बैठकों और पर्यवेक्षक की रिपोर्ट के बाद मणिपुर में नई सरकार और नेतृत्व की तस्वीर साफ हो जाएगी।