आइजोल। मिजोरम, जो कभी “दूर-दराज का राज्य” माना जाता था, आज मानवता की मिसाल बनकर उभर रहा है। पिछले दो वर्षों में **करीब 31,000 म्यांमार शरणार्थियों**, ज्यादातर चिन समुदाय के लोग, राज्य में सुरक्षित आश्रय, भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं और सुरक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इस कदम ने न केवल पड़ोसी देश की मदद की, बल्कि **भारत की अंतर्राष्ट्रीय छवि को भी नई ऊंचाई** दी है।
इस मानवीय पहल का सीधा लाभ मिजोरम के **पर्यटन क्षेत्र** को मिला। 2023-2024 में राज्य में पर्यटन में **145.54% की रिकॉर्ड वृद्धि** दर्ज की गई। पर्यटन मंत्रालय के अनुसार, रेल कनेक्टिविटी के विस्तार, 2026 इवेंट कैलेंडर और एक्सपीरियंसियल टूरिज्म जैसी पहलों ने इस वृद्धि को और तेज किया। राज्य सरकार **650 करोड़ रुपये के निवेश** से नए पर्यटन स्थल, जैसे थैनजाल वॉटरफॉल और गोल्फ कोर्स, विकसित करने की योजना बना रही है।
पर्यटन मंत्री **ललन्घिंगलोवा ह्मर** का कहना है कि “म्यांमार शरणार्थियों की देखभाल ने हमारी अंतर्राष्ट्रीय छवि को मजबूत किया और इसका सकारात्मक असर पर्यटन पर पड़ा। शरणार्थी यहां सुरक्षित और स्वस्थ हैं।”
हालांकि, चुनौतियां भी कम नहीं हैं। राज्य में वर्तमान में **30,438 शरणार्थी** हैं, जिनमें से लगभग 85% का **बायोमेट्रिक एनरोलमेंट** पूरा हो चुका है। बेहतर प्रबंधन के लिए राज्य सरकार **सभी शरणार्थियों को केंद्रीकृत शेल्टर होम्स** में स्थानांतरित करने की योजना बना रही है।
साथ ही, केंद्र सरकार की **भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़बंदी और फ्री मूवमेंट रिजीम (FMR) समाप्त करने की नीति** सुरक्षा और अवैध घुसपैठ रोकने के लिए है। मिजोरम सरकार और लोकल सिविल सोसाइटी जैसे एमजेडपी और जेडओआरओ इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं, उनका कहना है कि यह **मिजो-चिन ब्रदरहुड** को कमजोर करेगा और भाईचारे में दूरी डालेगा।
कुल मिलाकर, यह मामला अब केवल मिजोरम का नहीं रहा, बल्कि **भारत की विदेश नीति, मानवता बनाम सुरक्षा और नॉर्थ ईस्ट में संघीय ढांचे की परीक्षा** बन गया है।