सत्यनारायण मिश्र
ईटानगर। केंद्र सरकार ने अरुणाचल प्रदेश में कमला नदी पर प्रस्तावित 26069.5 करोड़ रुपये की 1,720 मेगावाट की कमला जलविद्युत परियोजना को मंजूरी दे दी है। यह एक स्टोरेज-आधारित योजना है, जिसमें बाढ़ नियंत्रण (फ्लड मॉडरेशन) की सुविधा भी शामिल है, जो चीन के तिब्बत में 60000 मेगावाट के जलविद्युत प्रोजेक्ट से ब्रह्मपुत्र घाटी में संभावित बाढ़ से राहत प्रदान करेगी। इसे पूरा होने में लगभग 8 साल का समय लगेगा। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए इसे राज्य और समूचे देश के लिये एक लैंडमार्क कदम बताया है। यह परियोजना अरुणाचल प्रदेश के हाइड्रोपावर पोटेंशियल को बढ़ावा देगी और पूर्वोत्तर क्षेत्र की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी।
कमला जलविद्युत परियोजना के मुख्य तथ्य:
• क्षमता: 1,720 मेगावाट (MW)।
• स्थान: अरुणाचल प्रदेश के कमले, क्रा दादी और कुरुंग कुमेय जिलों में कमला नदी पर।
• लागत और फंडिंग: कुल लागत 26,069.5 करोड़ रुपये (70:30 डेट-इक्विटी अनुपात)। केंद्र सरकार से 1,340 करोड़ रुपये इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए और 4,744 करोड़ रुपये बाढ़ नियंत्रण कंपोनेंट के लिए ग्रांट मिलेगी। अरुणाचल सरकार राज्य GST की 100% रीइंबर्समेंट करेगी।
• कार्यान्वयन: एनएचपीसी और अरुणाचल प्रदेश सरकार की जॉइंट वेंचर कंपनी द्वारा। एनएचपीसी के पास 74% और राज्य के पास 26% इक्विटी होगी। यह बिल्ड-ओन-ऑपरेट-ट्रांसफर आधार पर होगी।
• लाभ: सालाना लगभग 6,870 मिलियन यूनिट हरित ऊर्जा उत्पादन। बाढ़ राहत के अलावा नेट-जीरो लक्ष्य 2070 में योगदान। लेवलाइज्ड टैरिफ 5.97 रुपये प्रति यूनिट। निर्माण पीक पर 300 डायरेक्ट और 2,500 कॉन्ट्रैक्ट जॉब्स।
• टाइमलाइन: पूरा होने में 96 महीने (8 साल) लगेंगे।
यह परियोजना अरुणाचल प्रदेश के हाइड्रोपावर पोटेंशियल को बढ़ावा देगी और पूर्वोत्तर क्षेत्र की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी।
चीन की मेगा जलविद्युत परियोजना के मुकाबले इसका असर
चीन तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी, जो भारत में सियांग और फिर ब्रह्मपुत्र बनती है, पर दुनिया की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना बना रहा है। इसकी क्षमता लगभग 60,000 मेगावाट (या इससे अधिक), सालाना 300 बिलियन किलोवाट-घंटे बिजली उत्पादन, जलभंडारण क्षमता 40 बिलियन क्यूबिक मीटर और लागत 137-170 बिलियन डॉलर (लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक) अनुमानित है। चीन का दावा है कि यह डाउनस्ट्रीम देशों (भारत और बांग्लादेश) पर नकारात्मक प्रभाव नहीं डालेगा, लेकिन भारत को चिंता है कि सूखे मौसम में पानी की कमी या अचानक रिलीज से बाढ़ आ सकती है। इसके जवाब में भारत की मुख्य रणनीति सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (एसयूएमपी) है, जो सियांग नदी पर प्रस्तावित है:
• क्षमता: 11,000 मेगावाट।
• जलभंडारण: 9-14 बिलियन क्यूबिक मीटर, जो चीन से आने वाले अचानक पानी को रोक सकता है और सूखे में रिलीज कर सकता है।
• उद्देश्य: चीन के डैम के प्रभाव को कम करना, पानी की सुरक्षा सुनिश्चित करना और “फर्स्ट यूजर राइट्स” मजबूत करना।
• लागत: अनुमान 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक।
• स्थिति: प्री-फिजिबिलिटी स्टडी चल रही है, लेकिन स्थानीय आदिवासी समुदायों (खासकर आदि जनजाति) से मजबूत विरोध – गांव डूबने, पर्यावरण क्षति और विस्थापन की आशंका। कुछ गांवों ने सहमति दी है, लेकिन प्रदर्शन जारी हैं।
कमला परियोजना का असर: यह सीधे तौर पर चीन के मेगा डैम का “काउंटर” नहीं है (क्योंकि यह कमला नदी पर है, सियांग पर नहीं), लेकिन ब्रह्मपुत्र घाटी में बाढ़ नियंत्रण से अप्रत्यक्ष रूप से मदद करेगी। यह अरुणाचल में भारत के व्यापक हाइड्रोपावर पुश का हिस्सा है, जो चीन की ऊपरी पहुंच को बैलेंस करने की रणनीति है।
कुल प्रभाव:
• सकारात्मक: भारत स्टोरेज क्षमता बढ़ाकर पानी के प्रवाह को नियंत्रित कर सकता है, बाढ़/सूखे से बचाव और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत।
• चुनौतियां: दोनों देशों के डैम हिमालयी क्षेत्र में भूकंप-संवेदनशील हैं, जिससे जोखिम बढ़ता है। स्थानीय विरोध, पर्यावरण क्षति और भारत-चीन तनाव बढ़ने की आशंका। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों को डेटा शेयरिंग और सहयोग बढ़ाना चाहिए, वरना “वॉटर वॉर” जैसी स्थिति बन सकती है।
• बांग्लादेश पर असर: ब्रह्मपुत्र उसके लिए महत्वपूर्ण है, सेडिमेंट असंतुलन से नुकसान हो सकता है।
यह विकास भारत की जल और ऊर्जा सुरक्षा के लिए रणनीतिक है, लेकिन पर्यावरण एवं स्थानीय हितों का संतुलन जरूरी है।