सत्यनारायण मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार
गुवाहाटी। यहां असम रॉयल ग्लोबल यूनिवर्सिटी (आरजीयू) में एक विशिष्ट शैक्षणिक सहयोग कार्यक्रम में आये चाइनीज काउंसलर यांग शियुहुआ ने चौंकाने वाली बात कही है। इससे भारत-चीन के शैक्षिक संबंधों को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। चाइनीज काउंसलर के मुताबिक भारतीय विश्वविद्यालयों में वर्तमान में केवल सात चीनी स्टूडेंट्स पढ़ रहे हैं! दूसरी ओर भारत से चीन में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स की संख्या 14,000 से अधिक हो चुकी है। यांग शियुहुआ का कहना था कि ऐसा भारत की कठोर वीजा और चीनी छात्रवृत्ति नीति के कारण हुआ है। उन्होंने असम के इस निजी विश्वविद्यालय संग शैक्षणिक सहयोग की इच्छा जताई है।
यांग ने कहा कि कि वर्ष 2020 में भारत और चीन के बीच 54 समझौता ज्ञापन (MoUs) पर हस्ताक्षर हुए। शैक्षिक और सांस्कृतिक सहयोग की दिशा में एक अहम कदम था। उन्होंने कहा, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के प्रयासों से भारत-चीन संबंधों की बर्फ पिघल रही है, और यह शिक्षा सहयोग के नए अवसर ला सकता है। भारतीय पक्ष द्वारा चीन में एक शिक्षा प्रदर्शनी भी आयोजित की जा सकती है। चाइनीज काउंसलर ने सफाई दी कि हम हमेशा चीनी स्टूडेंट्स को भारत में अध्ययन के लिये प्रोत्साहित करते हैं। पिछले दो दशकों में चीन वैश्विक स्तर पर अंतर्राष्ट्रीय स्टूडेंट्स का शीर्ष स्रोत था। अब भारत अंतर्राष्ट्रीय स्टूडेंट्स का अहम स्रोत बन गया है। उन्होंने यहां के स्टूडेंट्स से चीनी भाषा सीखने पर बल दिया। चीनी शिक्षा मंत्रालय ने भारतीय छात्रों के लिए चयन प्रक्रिया शुरू की है, जो 2025 में 500 से अधिक छात्रवृत्तियाँ देने की योजना बना रहा है।
चीनी छात्रों की भारत में न्यूनतम संख्या का कारण भारत की सख्त वीजा नीति है। जून 2020 में गलवान घाटी संघर्ष के बाद भारत ने चीनी नागरिकों के लिए वीजा नियमों को कड़ा कर दिया, जिसमें छात्र वीजा के लिए अतिरिक्त सुरक्षा मंजूरी अनिवार्य की गई। भारतीय विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2021-2023 के दौरान चीनी छात्रों के वीजा आवेदनों में 85% की कमी आई। यांग ने इस मुद्दे को शैक्षिक सहयोग की सबसे बड़ी बाधा बताया और दोनों देशों से इसे हल करने की अपील की।
वहीं, भारत से चीन में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स की संख्या में उछाल चीनी सरकार की उदार छात्रवृत्ति नीति का परिणाम है। चीनी विदेश मंत्रालय के नवीनतम डेटा (जुलाई 2025) के अनुसार, 14,726 भारतीय स्टूडेंट्स वर्तमान में चीन में पढ़ रहे हैं, जिनमें से 92% मेडिकल कोर्सेज (एमबीबीएस) के लिए दाखिला लिया है। चीनी सरकार की ‘सिल्क रोड स्कॉलरशिप’ के तहत 2024-25 में 1,200 भारतीय स्टूडेंट्स को पूर्ण छात्रवृत्ति मिली, जो पश्चिमी देशों की तुलना में 60-70% कम फीस वाली शिक्षा प्रदान करती है।
AISHE 2021-22 के अनुसार, कुल 46,878 विदेशी स्टूडेंट्स थे, लेकिन चीनी स्टूडेंट्स की संख्या 50 से कम अनुमानित थी, जो 2025 में और घटकर (जैसा चाइनीज काउंसलर ने कहा) 7 रह गई।
जबकि चीनी शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, 2019 में 23,000 भारतीय स्टूडेंट्स थे, जो कोविड-19 के कारण 14,000 तक गिर गए, लेकिन 2023-24 में फिर बढ़कर 14,726 हो गए।एक डेटा से पता चलता है कि 2024 में केवल 12 चीनी स्टूडेंट्स को वीजा मिला, जबकि 2019 में यह संख्या 1,200 थी।