शिमला, हिमाचल प्रदेश में बीती रात से लगातार हो रही मूसलधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। कई जिलों में भारी भूस्खलन, सड़कें बंद, मकानों के ध्वस्त होने और जानमाल के भारी नुकसान की खबरें सामने आई हैं। राज्य सरकार और मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
प्रदेश के 10 से अधिक जिलों में बारिश कहर बनकर टूटी है और अगले 72 घंटों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। चंबा जिले में एक ही गांव में दो लोगों की जान चली गई है, वहीं पूरे राज्य में अब तक 119 लोगों की मौत, 34 लोग लापता और 215 लोग घायल हो चुके हैं।
शिक्षण संस्थान बंद, जनजीवन अस्त-व्यस्त
भारी बारिश और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई उपमंडलों में स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र आज बंद रखे गए हैं।
बंद किए गए क्षेत्रों में शामिल हैं:
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मंडी जिले के थुनाग
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शिमला जिले के रोहड़ू, जुब्बल, कुमारसैन, चौपाल और सुन्नी (जलोग उपतहसील)
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ठियोग क्षेत्र में संपर्क मार्ग बाधित होने के कारण एसडीएम ने एक दिन की छुट्टी घोषित की है।
चंबा में मकान पर गिरा पत्थर, दो की मौत
चंबा जिले की ग्राम पंचायत चड़ी के सूताह गांव में एक मकान पर भूस्खलन के चलते भारी पत्थर गिरने से 55 वर्षीय पुरुष और 50 वर्षीय महिला की मौत हो गई। यह घटना रात के समय हुई जब सभी लोग घरों में सो रहे थे। बचाव दल ने शवों को मलबे से बाहर निकाला और राहत कार्य जारी है।
भूस्खलन से हाईवे और मुख्य सड़कें बंद
बारिश के चलते कई राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग पूरी तरह बाधित हो गए हैं:
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मंडी-कुल्लू नेशनल हाईवे पर 4 माइल और 9 माइल के बीच फिसलन और गिरते पत्थरों के कारण केवल एकतरफा यातायात संभव है।
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पंडोह-औट मार्ग पूरी तरह बंद है।
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एनएच-707 (शिलाई–लालढांग) और औट–लुहरी एनएच-305 पर भूस्खलन के कारण यातायात पूरी तरह ठप है।
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शिमला के ऊपरी क्षेत्रों में भी कई सड़कें मलबे से बंद हैं।
डैम से छोड़ा गया पानी, जलस्तर में वृद्धि की चेतावनी
लगातार बारिश के कारण कोलडैम, लारजी डैम और नाथपा बांध से अतिरिक्त पानी छोड़ा गया है। इससे सतलुज और अन्य प्रमुख नदियों के जलस्तर में 4-5 मीटर तक की वृद्धि हो सकती है।
प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को नदी-नालों से दूर रहने की सख्त चेतावनी जारी की है।
मौसम विभाग का अलर्ट: अगले तीन दिन चुनौतीपूर्ण
मौसम विज्ञान विभाग, शिमला ने चेताया है कि अगले तीन दिन और मुश्किल भरे हो सकते हैं।
अलर्ट विवरण इस प्रकार है:
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21 जुलाई: ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा, सोलन, मंडी और सिरमौर में ऑरेंज अलर्ट
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22 जुलाई: सोलन और सिरमौर में फिर ऑरेंज अलर्ट, अन्य जिलों में येलो अलर्ट
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23 जुलाई: ऊना और बिलासपुर में पुनः ऑरेंज अलर्ट
लोगों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
भारी नुकसान: घर, दुकानें और पशुधन तबाह
राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) से मिली जानकारी के अनुसार:
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377 घर, 264 दुकानें और 945 गौशालाएं पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं
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733 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त
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21,500 पोल्ट्री पक्षी और 1288 पालतू पशु मारे जा चुके हैं
सबसे ज्यादा नुकसान मंडी जिले में दर्ज किया गया है:
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350 घर, 241 दुकानें और 767 गौशालाएं पूरी तरह नष्ट
जिलावार मौतों का आंकड़ा
| जिला | मौतें | लापता |
|---|---|---|
| मंडी | 21 | 27 |
| कांगड़ा | 19 | — |
| कुल्लू | 15 | — |
| चंबा | 10 | — |
| ऊना | 9 | — |
| सोलन | 9 | — |
| हमीरपुर | 9 | — |
| शिमला | 8 | — |
| बिलासपुर | 8 | — |
प्रशासन की तैयारी और अपील
राज्य सरकार ने सभी जिला प्रशासन को आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखने और संवेदनशील क्षेत्रों में रेस्क्यू टीमें तैनात करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कहा गया है:
“जनता की सुरक्षा सर्वोपरि है। प्रशासन 24×7 स्थिति पर नजर बनाए हुए है। हम लोगों से अपील करते हैं कि अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल सरकारी सूचना स्रोतों पर भरोसा करें।”