ईरान के परमाणु ठिकानों को नुकसान और यूरेनियम स्थानांतरण के दावों पर छाया कुहासा

सत्यनारायण मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार

ईरान ने अब दावा किया है कि इज़राइल और अमेरिका के हालिया हवाई हमलों में उसके नतांज़, फोर्डो, और इस्फहान परमाणु ठिकानों को मामूली नुकसान हुआ है और उसने संवर्द्धित यूरेनियम को हमले से पहले ही सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया था! लेकिन, क्या इतनी बड़ी मात्रा में अत्यन्त रेडियोधर्मी यूरेनियम को गुप्त और सुरक्षित रूप से हटाना वाकई संभव है? इस सवाल के जवाब में दुनिया अनिश्चितता के साये में खड़ी है।

हमलों की पृष्ठभूमि:

13 जून 2025 को इज़राइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर पहला हमला बोला, जिसका लक्ष्य नतांज़ और फोर्डो की भूमिगत यूरेनियम संवर्द्धन सुविधाएँ थीं। इसके बाद, 22-23 जून को अमेरिका ने बी-2 स्टील्थ बमवर्षकों और 30,000 पाउंड के जीबीयू-57 मैसिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर (बंकर-बस्टर) बमों के साथ फोर्डो, नतांज़, और इस्फहान पर सटीक हमले किए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि फोर्डो “पूरी तरह नष्ट” हो गया, जबकि रक्षा मंत्रालय ने इसे ईरान के “परमाणु हथियार विकास को बड़ा झटका” बताया।

सैटेलाइट तस्वीरों से फोर्डो के प्रवेश द्वारों, नतांज़ के ऊपरी ढांचे, और इस्फहान की कुछ ईमारतों को नुकसान की पुष्टि हुई है। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी ने नतांज़ की सतह पर व्यापक क्षति की सूचना दी, लेकिन गहरी भूमिगत सेंट्रीफ्यूज सुविधाओं, जो हजारों उन्नत IR-6 सेंट्रीफ्यूज से लैस हैं, की स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है।

ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने दावा किया है कि इन हमलों से परमाणु ठिकानों को न के बराबर नुकसान हुआ है। संवर्द्धित यूरेनियम को पहले ही गुप्त ठिकानों पर ले जाया गया था। उन्होंने रेडियोधर्मी रिसाव की आशंकाओं को खारिज करते हुए दावा किया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम पहले से अधिक मज़बूत है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी समर्थन में कहा है कि नतांज़, फोर्डो, और बुशहर में संवर्द्धन प्रक्रिया बाधित नहीं हुई।
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की फरवरी 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के पास लगभग 2,000 किलोग्राम 60% संवर्द्धित यूरेनियम है, जो हथियार-ग्रेड (90%) तक पहुँचने के लिए कुछ महीनों में पर्याप्त हो सकता है। इस यूरेनियम को सुरक्षित स्थानांतरित करने के लिए लेड-लाइन वाले विशेष कंटेनर, प्रशिक्षित कर्मचारी, और सख्त प्रोटोकॉल चाहिए।
उड़ान ट्रैकिंग डेटा से संकेत मिले हैं कि हमलों से पहले तेहरान से कई कार्गो उड़ानें अज्ञात स्थानों के लिए रवाना हुईं, जो सामग्री स्थानांतरण का संकेत हो सकती हैं।

तकनीकी और रणनीतिक चुनौतियाँ:

क्या इतनी बड़ी मात्रा में यूरेनियम को गुप्त रूप से हटाना संभव है? स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के परमाणु विशेषज्ञ सिगफ्राइड हेकर का कहना है कि ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को हमलों से बचाने के लिए “बिखरा हुआ ढांचा” विकसित किया है। छोटे, गुप्त ठिकानों पर यूरेनियम का भंडारण तकनीकी रूप से संभव है, लेकिन लॉजिस्टिक रूप से जटिल है।
वाशिंगटन के सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के विश्लेषक जॉन ऑल्टरमैन ने चेतावनी दी कि “फोर्डो जैसी सुविधाएँ, जो 1,000 मीटर गहरी चट्टानों में बनी हैं, से यूरेनियम को जल्दबाजी में हटाना जोखिम भरा है।” अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के निगरानी उपकरणों को 2022 में हटाए जाने के बाद स्वतंत्र सत्यापन लगभग असंभव है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने माना है कि उन्हें ईरान के यूरेनियम भंडार के वर्तमान स्थान की सटीक जानकारी नहीं है।

रेडियोधर्मी जोखिम और पर्यावरणीय चिंताएँ:

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी और यूनिवर्सिटी ऑफ शेफील्ड के परमाणु विशेषज्ञ साइमन बेनेट के मुताबिक गहरी भूमिगत सुविधाओं पर हमलों से रेडियोधर्मी रिसाव का जोखिम न्यूनतम है, क्योंकि ये कंक्रीट और स्टील की मोटी परतों से सुरक्षित हैं। फिर भी, पर्यावरणीय प्रभावों की दीर्घकालिक जाँच आवश्यक है। ईरान ने रिसाव की आशंकाओं को पश्चिमी प्रचार करार दिया है।

क्षेत्रीय और वैश्विक निहितार्थ:

इन हमलों ने मध्य पूर्व को युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में इज़राइल पर 400 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे, जिससे तेल अवीव और यरुशलम में सीमित नुकसान हुआ। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अभूतपूर्व खतरा बताया।
चीन और रूस ने हमलों की निंदा की, जबकि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देश तटस्थ रुख अपनाए हुए हैं। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है, क्योंकि बढ़ती तेल कीमतें और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं।

दरअसल ईरान के परमाणु ठिकानों को नुकसान की वास्तविक स्थिति और यूरेनियम स्थानांतरण के दावों की सच्चाई अभी रहस्य बनी हुई है। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी की सीमित निगरानी और स्वतंत्र स्रोतों के अभाव में सत्यापन मुश्किल है। क्या ईरान ने अपने परमाणु भंडार को बचा लिया, या यह रणनीतिक बयानबाजी है? जवाब तलाशने के लिए दुनिया की निगाहें राजनयिक प्रयासों, और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर टिकी हैं। इस बीच, मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव वैश्विक शांति के लिए गंभीर चुनौती पेश कर रहा है। केवल उम्मीद कर सकते हैं कि संवाद और संयम इस संकट को शांतिपूर्ण समाधान की ओर ले जाएगा।

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