जनपक्षीय महान पत्रकार थे वीरेन्द्र सेंगर: धीरेन्द्र प्रताप

नई दिल्ली। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में वरिष्ठ पत्रकार वीरेन्द्र सेंगर के निधन पर एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। श्रद्धांजलि सभा में पत्रकार और वीरेन्द्र सेगर के शुभचिंतक शामिल हुए। उल्लेखनीय है कि वीरेन्द्र सेंगर जी का कल उत्तराखंड के नैनिताल में हृदयगति से रूकने से निधन हो गया था। उनका अंतिम संस्कार आज सुबह नोएडा में किया गया, जहां पर सैकडों पत्रकार, राजनीतिज्ञ और विभिन्न क्षेत्रों के लोग उपस्थित थे और उन्हें अंतिम विदाई दी। श्रद्धांजलि सभा आयार्च विष्णुगुप्त की अध्यक्षता में सपंन्न हुई।

श्रद्धांजलि सभा को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित करते हुए उत्तराखंड आंदोलन के वरिष्ठ नेता और मीडिया प्रेमी धीरेन्द्र प्रताप ने कहा कि वीरेन्द्र सेंगर एक महान जनपक्षीय पत्रकार थे, उनकी संवेदनशीलता लोगों को आश्चर्य में डाल देती थी। हर किसी को कैसे अपना बनाना है वह वीरेन्द्र सेंगर जानते थे, उनकी लेखनी की हम चर्चा करें तो स्पष्ट होता है कि आम आदमी उनकी प्राथमिकता में होता था और जनसमस्याएं उनके निशाने पर होती थी। उनकी लेखनी यह बताती है कि आम आदमी के संघर्ष को कैसे आगे बढाया जाना चाहिए और उसके समाधान में अपनी भूमिका कैसे निभानी चाहिए। धीरेन्द्र प्रताप ने आगे कहा कि मीडिया और राजनीति का संबंध बहुत ही प्रगाढ होता है। वीरेन्द्र सेंगर के देश के शीर्ष नेतृत्व के साथ भी बहुत अच्छे संबध थे और उन्होंने राजनीति को बहुत ही नजदीक से देखा समझा था। लेकिन उन्होंने अपने राजनीतिक संबंधों का उपयोग कभी भी निजी फायदे के लिए नहीं किया। कभी उन्होंने पैसा बनाने या फिर पद पाने की ओर दौड नहीं लगायी।
वरिष्ठ पत्रकार रेवती रमन पांडेय ने कहा कि वीरेन्द्र सेंगर जी पर्यावरण प्रेमी थे, उन्हें प्रकृति से बडा ही लगाव था, व ेजल, जंगल और जमीन को संरक्षित करने का विचार रखते थे। दिल्ली में उनका निजी आवास था। लेकिन वे उत्तराखंड के नैनिताल में जाकर बस गये थे। कोराना काल से वे नैनिताल में रह रहे थे पर दिल्ली हमेशा आते जाते रहते थे। नैनिताल में रहते हुए भी उन्होने दिल्ली से अपना संबंध बनाये रखा था और अपनी लेखनी भी जारी रखी थी। नैनिताल मे रहना उन्होंने इसलिए पंसद किया था ताकि वे प्रकृति की बारीकियां समझ सकें और शुद्ध वातावरण के संरक्षण अपना योगदान दे सकें।
वरिष्ठ पत्रकार और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता सत्य प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि वे देश के बडे पत्रकार थे, उन्होंने कई राष्ट्रीय अखबारों में कार्य किया और नेतृत्व भी किया। खबरों के प्रति उनकी नजर काफी विलक्षण थी। सबसे बडी बात यह है कि सत्ता को आलोचना का पात्र बनाने में वे हमेशा आगे रहते थे। सत्ता जनविरोधी होती है, वे इस मंत्र को जानते थे। इसलिए सत्ता को उनकी जवाबदेहियों के प्रति अपनी लेखनी से आगाह भी करते थे। उनके निधन से मीडिया जगत को अपूरनीय छवि हुई है। हमें उनकी यादों को संरक्षित रखना चाहिए, मीडिया में आने वाले नये लोगों को वीरेन्द्र सेंगर जी की लेखनी से सीख लेनी चाहिए।
श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता करते हुए आचार्य विष्णुगुप्त ने कहा कि वे विरोधी विचारों को भी आसानी से आत्मसात कर लेते थे। विरोधी विचारों के आलोचक वे जरूर थे पर विरोधी विचारों को घृणा से नहीं देखते थे। हम लोग अलग-अलग विचारधारा के थे फिर भी हमलोग एक दूसरे के संघर्ष के प्रति समर्थक और ईमानदार थे। श्रद्धाजलि सभा में उत्तराखंड आंदोलन के नेता और वरिष्ठ संपादक देव सिंह रावत, कुशाल जीना, राजनीतिज्ञ योगेन्द्र यादव और विजय सती भी शामिल थे।
श्रद्धांजलि सभा के अंत में वीरेन्द्र सेंगर जी को एक मिनट का मौन रखकर विनम्र श्रद्धांजलि दी गयी और वीरेन्द्र सेंगर जी की यादों को संरक्षित करने का संकल्प भी लिया गया।

Leave a Reply