इस दिन प्रेमी जोड़ा एक-दूसरे को प्रपोज करता है। वहीं आप चाहें तो गुलाब और गिफ्ट के साथ उन्हें प्रपोज करने जा सकते हैं।चॉकलेट तो सभी को पसंद होती है। वहीं लड़कियों को यह सबसे ज्यादा पसंद होती है। प्यार का इजहार करने के लिए चॉकलेट का सहारा लिया जा सकता है इससे सामने वाले की नाराजगी को पल भर में दूर किया जा सकता है वहीं अपने रुठे हुए प्रियजनों को इससे मनाया जा सकता है। इस दिन चॉकलेट देने से प्यार बढ़ता है।लड़कियों को टैडी बहुत पसंद होता है। टैडी को पूरी दुनिया में प्यार का प्रतीक माना जाता है। बचपन के साथ ही यह आपकी जवानी के भी साथी होते हैं।वायदे हर रिश्ते की आधारशिला होते हैं। यह आपके हेल्दी रिलेशनशिप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस दिन आप जिससे प्यार करते हैं उनसे कोई खास वादा कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रहे ऐसा वादा ना कर बैठें जिसे आप बाद में निभा ना सकें। इसलिए सोच-समझकर वादा दें। छठे दिन को किस डे के तौर पर मनाया जाता है। इस दिन प्रेमी युगल किस के जरिए अपने प्यार का अहसास पार्टनर को करवाते हैं।गले लगाकर आप बहुत से रुठे हुए अपने प्रियजनों को मना सकते हैं। इस दिन आप गर्मजोशी से एक-दूसरे को गले लगाकर अपनी भावनाओं का अहसास दिला सकते हैं। हग प्यार, केयर और प्रोटेक्शन को दर्शाता है।जबकि वैलेनटाइन डे प्यार करने वालों के लिए महत्वपूर्ण दिन होता है। इस दिन को प्रेमी जोड़ा एक-दूसरे के लिए स्पेशल बनाने के साथ ही उसे कभी ना भूलने वाला दिन बनाने की कोशिश करते हैं। हालांकि कुछ लोग इस दिन को शोक दिवस के रूप मे भी मनाते है क्योकि इसी दिन प्रेम व विवाह के समर्थक सन्त वेलनटाइन को फांसी पर चढ़ाया गया था।यानि यह पर्व प्यार के इजहार का अवसर है तो सन्त वैलेंटाइन को फांसी पर चढाये जाने के कारण शोक मनाने की घड़ी भी है।लेकिन दुनिया भर के लोग शोक भूलकर इसके मूलपक्ष प्रेम का इजहार रूप में इस उत्सव को मनाते है।जिसका महत्व व चलन भारत मे भी निरन्तर बढ़ता जा रहा है।लेकिन अच्छा यही है कि हम अपने उस परमपिता परमात्मा शिव को प्रेम करे जो सर्व सुखों का सागर है और हमारा पालनहार भी,जिसकी हम सब सजनियां है और परमात्मा हम सभी आत्मा रूपी सजनियो का साजन है, हम परमात्मा को याद करके या फिर परमात्मा को पत्र लिखकर अपने प्रेम का इज़हार कर सकते है,जैसा कि ब्रह्माकुमारीज में हर दिन को प्रेम का दिवस मानकर परमात्मा को पत्र लिखने और उनकी याद में रहने सीख दी जाती है,साथ ही यह विकारों को त्यागकर पतित से पावन बनने के लिए संकल्प लेने का भी अवसर है।जिसके रास्ते हम परमात्मा को न सिर्फ प्राप्त कर सकते है,बल्कि उनसे रूह रिहान करके अलौकिक सुख भी प्राप्त कर सकते है।
(लेखक ब्रह्माकुमारीज से जुड़े आध्यात्मिक चिंतक व वरिष्ठ साहित्यकार है)