पूर्वोत्तर राज्यों के लिए विशेष प्रावधानों को नहीं छूएंगे : केंद्र सरकार

नयी दिल्ली।  सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से केंद्र सरकार ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों पर लागू विशेष प्रावधानों में हस्तक्षेप करने का उसका कोई इरादा नहीं है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पांच सदस्यीय संविधान पीठ को सूचित करते हुए कहा कि मेरे पास यह बताने के निर्देश हैं। हमें अस्थायी प्रावधान, अनुच्छेद 370 और उत्तर पूर्व से संबंधित विशेष प्रावधानों के बीच अंतर करना चाहिए।

 केंद्र सरकार ( Central Government) का किसी को भी छूने का कोई इरादा नहीं है। वह भाग जो उत्तर पूर्व और अन्य क्षेत्रों को विशेष प्रावधान देता है। मेहता की दलील वरिष्ठ वकील मनीष तिवारी के बाद आई, जो संविधान के अनुच्छेद 370(Article 370) को निरस्त करने को चुनौती देने वाले एक मामले में पीठ के समक्ष दलीलें पेश कर रहे थे और अरुणाचल प्रदेश के एक राजनेता का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। 

उन्होंने कहा कि भारत का संविधान(Constitution of India), एक राजनीतिक होने के अलावा -सामाजिक समझौता, हमेशा से एक राष्ट्रीय सुरक्षा दस्तावेज़ रहा है। यह केवल राज्य की कठोर शक्ति के उपयोग के बारे में नहीं है। मेरे उत्तर पूर्व में आने से पहले भारत (India)की परिधि में थोड़ी सी भी आशंका महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है। न्यायमूर्ति एसके कौल ने भी सीजेआई के दृष्टिकोण से सहमति व्यक्त की और टिप्पणी की और कहा कि अनुच्छेद 370 निश्चित रूप से एक अस्थायी प्रावधान है। हालांकि यह तर्क दिया गया है कि यह नहीं है, यह मामले का संदर्भ है।

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