पुरोहित-मान में बढ़ती दरार

  • सिख गुरुद्वारा एक्ट में संशोधन को मंजूरी को लेकर बढ़ रही तनातनी
  • सीएम ने राज्यपाल को लिखी चिट्ठी लेकिन अब तक नहीं मिली मंजूरी

सुमित्रा, चंडीगढ़।

सिख गुरुद्वारा एक्ट में संशोधन को मंजूरी देने के मामले को लेकर पंजाब के राज्यपाल बनवारी पुरोहित और मुख्यमंत्री भगवंत मान (Chief Minister Bhagwant Mann) के बीच एक बार फिर तनातनी शुरू हो गई है। राज्यपाल (governor)ने इस एक्ट को अभी मंजूरी नहीं दी है, मंजूरी देंगे या नहीं, अभी कुछ कहना मुश्किल है। दूसरी तरफ, मान ने पुरोहित को चिट्ठी लिख कर कहा है कि मंजूरी नहीं देना एक तरह से लोगों की इच्छाओं का गला घोंटना है।

राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच पंजाब विधानसभा सत्र को लेकर भी तनातनी जारी है। राज्यपाल पुरोहित जहां इस सत्र को असंवैधानिक करार दे रहे हैं, वहीं मान कह रहे हैं कि उन्होंने कच्ची गोलियां नहीं खेली हैं। मान का कहना है कि उन्हें सदन से पारित सिख गुरुद्वारा एक्ट को मंजूरी देने में देर नहीं करनी चाहिए, जबकि पुरोहित कहते हैं कि जब सत्र ही संवैधानिक नहीं था तो एक्ट को मंजूरी देने का कोई अर्थ ही नहीं रह जाता है।

मान चाहते हैं एक्ट में संशोधन को फौरन मंजूरी दे दी जाए, ताकि हरमंदिर साहिब से पावन गुरबाणी के प्रसारण से बादल परिवार का एकाधिकार खत्म किया जा सके। मान यह भी चाहते हैं कि गुरबाणी का प्रसारण विभिन्न चैनलों और मीडिया के माध्यम से सभी को स्वतंत्र रूप से उपलब्ध हो। उन्होंने साफ किया है कि गुरबाणी के टेलीकास्ट को फिर से बादल परिवार की कंपनी के हाथ में नहीं जाने दिया जाएगा। राज्यपाल को लिखे पत्र में मान ने कहा है कि एक राजनीतिक परिवार के स्वामित्व वाले एक विशेष चैनल ने हरमिंदर साहिब से गुरबाणी के प्रसारण पर एकाधिकार कर लिया है और इससे मुनाफा कमाया जा रहा है।

यहां यह उल्लेखनीय है कि पवित्र गुरुओं की शिक्षाओं के प्रसार-प्रचार और गुरबाणी के निशुल्क प्रसारण को सुनिश्चित करने के लिए हाल ही में सिख गुरुद्वारा संशोधन एक्ट विधानसभा में बहुमत से पारित किया गया था। इसे 26 जून को राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा गया था, लेकिन पुरोहित ने इस संशोधन एक्ट पर अभी अपने दस्तखत नहीं किए हैं। मान के मुताबिक, दस्तखत नहीं करके राज्यपाल पंजाब के लोगों की लोकतांत्रिक इच्छाओं का गला घोंट रहे हैं।

गुरबाणी के प्रसारण के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने जो समझौता किया हुआ था, वह 23 जुलाई को खत्म हो चुका है। यदि राज्यपाल संशोधन एक्ट को मंजूरी नहीं देंगे तो कभी भी ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है कि दुनिया भर में लाखों श्रद्धालु हरमंदिर साहिब से पवित्र गुरबाणी का सीधा प्रसारण देखने से वंचित हो जाएं।

एसजीपीसी का अपना चैनल

इसी बीच शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने हरमंदिर साहिब से गुरबाणी का सीधा प्रसारण शुरू करने के लिए अपना खुद का यूट्यूब चैनल शुरू करने का फैसला किया है। पहले यह चैनल 24 जुलाई से शुरू होना था, लेकिन अभी इसमें कुछ देर हो सकती है। एसजीपीसी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने यह भी साफ कर दिया है कि किसी भी वेबसाइट या वेब चैनल को गुरबाणी के लाइव प्रसारण या डाउनलोडिंग के अधिकार नहीं दिए जाएंगे। प्रसारण के अधिकार पूरी तरह से एसजीपीसी के पास ही रहेंगे।

 

एसजीपीसी के महासचिव गुरचरण सिंह ग्रेवाल मानते हैं कि अपना चैनल शुरू करने के लिए स्टूडियो तैयार किया जा रहा है। गुरबाणी के सीधे प्रसारण के अलावा एसजीपीसी की विभिन्न गतिविधियों को भी संगत के साथ साझा किया जाएगा। गुरबाणी के प्रसारण के अधिकार पहले पीटीसी चैनल को दिए गए थे, लेकिन इस करार की अवधि 23 जुलाई को खत्म हो गई है। अब इस मामले में आगे कोई नया समझौता भी नहीं होगा।

एसजीपीसी के अपना चैनल शुरू करने की मांग काफी समय से उठ रही थी। इस मामले में कमेटी के सदस्यों का यह कहना था कि अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार ढ़ियों ज्ञानी हरप्रीत सिंह के आदेश पर फौरन अमल किया जाना चाहिए। सदस्यों ने यह भी मांग की थी कि गुरबाणी प्रसारण के लिए टेंडर मंगाने की नीति बंद कर दी जाए। ऐसे में एसजीपीसी ने अब अपना खुद का चैनल शुरू करने का निर्णय ले लिया है।

शाह से मिलेगी एसजीपीसी

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने मान सरकार की तरफ से गुरुद्वारा एक्ट में संशोधन को रुकवाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात का भी फैसला किया है। एसजीपीसी के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी इससे पहले राज्यपाल पुरोहित से भी मुलाकात कर इस बिल को मंजूरी नहीं देने का आग्रह कर चुके हैं। अब उन्होंने इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री शाह से मिलने का फैसला किया है। शाह से मिलने से पहले एसजीपीसी ने समान पंथक सोच वाले संगठनों की राय भी ली है।

धामी कहते हैं कि पंजाब सरकार ने गुरुद्वारा एक्ट में संशोधन कर के सिखों के धार्मिक मामलों में दखल दिया है, जबकि गुरुद्वारा एक्ट में कोई भी संशोधन एसजीपीसी की मंजूरी के बिना नहीं हो सकता है। इस एक्ट में संशोधन से श्री हरमंदिर साहिब में गुरबाणी के मुफ्त प्रसारण की व्यवस्था की गई है, लेकिन शुरू से ही एसजीपीसी इस बिल का विरोध कर रही है।

गुरुद्वारा एक्ट में संशोधन

पंजाब विधानसभा में सिख गुरुद्वारा एक्ट,1925 में संशोधन बिल बहुमत से पारित हो चुका है। शिरोमणि अकाली दल के विधायकों ने जरूर सदन में इस बिल का विरोध किया था। संशोधन बिल पर मुख्यमंत्री मान का मानना है कि गुरबाणी के प्रसारण पर किसी का ठेका नहीं चलने दिया जाएगा। पिछले साल अकाल तख्त के जत्थेदार ने एसजीपीसी को अपना चैनल शुरू करने की सलाह दी थी, लेकिन उस पर भी आज तक अमल नहीं किया गया है।

एसजीपीसी के गैर लोकतांत्रिक हो जाने का जिक्र करते हुए मान कहते हैं कि 11 साल से इसके चुनाव नहीं हुए हैं। सिखों के धार्मिक मामलों में दखल देने के आरोपों पर मान ने प्रतिक्रिया दी है। मान का कहना है कि एसजीपीसी को सिर्फ वीडियो प्रसारण पर ऐतराज है, रेडियो प्रसारण पर नहीं है। अब तक गुरबाणी के प्रसारण का अधिकार एक ही परिवार (इशारा बादल परिवार की तरफ था) के पास रहा है। मान चाहते हैं कि गुरबाणी सभी तक पहुंचे।

विधायक नछत्तर पाल इस बिल के विरोध में हैं। उनकी राय थी कि फैसला करने से पहले एसजीपीसी से मिल कर इस मुद्दे पर चर्चा कर ली जाए। उनके मुताबिक गुरबाणी का प्रसारण मुफ्त होना चाहिए, इसलिए मिल-बैठ कर फैसला करना ही ठीक रहेगा। अकाली दल के विधायक सुखविंदर सिंह सुक्खी भी मानते हैं कि एसजीपीसी सही तरीके से काम कर रही है, इसलिए बिल लाने की कोई जरूरत ही नहीं थी।

बहरहाल, सिख गुरुद्वारा एक्ट में संशोधन को लेकर राज्यपाल पुरोहित और मुख्यमंत्री मान अपनी अपनी बात पर डटे हैं। मान इसे मंजूरी दिलाना चाहते हैं और राज्यपाल बिल्कुल भी इसे मान्यता देने के पक्ष में नहीं हैं। देखना होगा कि इस मामले में कोई बीच का रास्ता निकलता है या फिर दोनों के बीच तनातनी और बढ़ती है।  परिणाम जानने के लिए थोड़ा और इंतजार करना पड़ेगा?

 

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