डा.पीयूष रौतेला को केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने दिया अवार्ड

अभी और नए शोध की जरूरत है : डा.पीयूष रौतेला

देहरादून । आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिशासी निदेशक डा.पीयूष रौतेला को मंगलवार को दिल्ली के डा.अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित एक समारोह में  नेशनल जियो साइंस अवार्ड -2019 से सम्मानित किया गया। इस अवार्ड में 3 लाख की धनराशि के चेक के अलावा प्रशस्ति पत्र भी प्रदान किया गया है।

यह पूरा कार्यक्रम केंद्रीय खनन मंत्रालय द्वारा आयोजित किया गया । खदानों में भूस्खलन और भूकंप को लेकर डॉ.पीयूष रौतेला ने अपना शोध कार्य किया है। खासकर डा.रौतेला भूस्खलन और भूकंप से होने वाली जनहानि को किस तरह से समय रहते खनन कार्य में जुटे लोगों श्रमिकों एवं आसपास के लोगों को अलर्ट किया जाए। ताकि खदान के अंचल में जानमाल की कमी कम से कम हो सके।

डा.रौतेला उत्तराखंड के पहले वैज्ञानिक हैं जिन्हें नेशनल जियो साइंस अवार्ड -2019 से भारत सरकार ने सम्मानित किया है। इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। डा.रौतेला ने आपदा से जुड़ी कई पुस्तकों एवं शोध कार्यों को भी अंजाम दिया है।

खास बात यह है कि मूक बहिर को लेकर डा.रौतेला ने एक फिल्म द साइलेंट हीरो  को भी आपदा से जोडक़कर बनाई है जिसकी न केवल देश बल्कि विदेशों में भी काफी प्रशंसा की गयी है। आपदा से जुड़ी यह फिल्म 11 दिसंबर 2015 को रिलीज की गई है। इसके अलावा डा.डा.पीयूष रौतेला की अगुआई में उत्तराखंड सरकार को वर्ष 2020 में सुभाष चंद्र बोस राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन पुरस्कार भी मिला है।

डा.रौतेला ने कहा कि उनके द्वारा किए गए शोध उन सभी राज्यों के काम आएगा जहां भूस्खलन और भूकंप की संभावनाएं बनी रहती हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड आपदा प्रभावित राज्य है। यहां और नए शोध की आवश्यकता है। डा.रौतेला ने कहा कि यह सम्मान पूरे देश का है। खासकर उत्तराखंड का तो है ही।

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