एक ही सांचे में ढला है संस्कृत की बेहाली और बहाली का कांड
बादल सरोज
हाल में उर्दू पर चले विमर्श में कुछ टिप्पणियाँ संस्कृत को लेकर भी आयीं हैं। हालांकि भाषाओं के बीच कोई द्वंद्व या टकराव नहीं है, उन्हें एक-दूसरे के मुकाबले खड़ा करने का कोई औचित्य नहीं है। ऐसा सिर्फ वे ही कर सकते हैं, जो किसी भी भाषा को न ठीक से जानते है, न बूझते हैं। तब भी, जब ऐसा…
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