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इमरजेंसी के पचास साल : मीडिया या तानाशाही की आंखों पर बंधी पट्टी

आलेख : राजेंद्र शर्मा इंदिरा गांधी के जिस इमरजेंसी निजाम के अब पचास साल हो रहे हैं, उसकी एक प्रमुख निशानी बेशक उन कुख्यात इक्कीस महीनों में प्रेस का दमन और उसकी स्वतंत्रता का छीना जाना थी। खासतौर पर इमरजेंसी के शुरूआती दौर की याद करते ही हमें अखबारों और पत्रिकाओं के जगह-जगह से काले रंग से…
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देखी तेरी तानाशाही!

आलेख : राजेंद्र शर्मा क्या 2024 का चुनाव पलट चुका है? एक नहीं, कई इशारे हैं, जो बताते हैं कि चुनाव पलट चुका है। बल्कि योगेंद्र यादव के शब्दों का सहारा लें, तो इस बार चुनाव 'मंझधार में पलट' चुका है। बेशक, तीसरे चरण के मतदान के साथ ही चुनाव आधे से ज्यादा गुजर चुका था। चौथे चरण की 96 सीटों पर 13…
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मोदी की गारंटी : भाजपा की जगह मोदी, लोकतंत्र की जगह तानाशाही

आलेख : बादल सरोज मतदान की शुरुआत होने में जब महज पांच दिन बचे थे तब कहीं जाकर मौजूदा सत्ता पार्टी भाजपा ने अपना “चुनाव घोषणापत्र” जारी किया। उपभोक्ताओं को लुभाने वाली मार्केटिंग की शैली में लिखे चुस्त खोखले संवादों, अनुपलब्धियों और विफलताओं को शब्दजाल में गोल-गोल घुमाकर बनाई गयी भूलभुलैया में…
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पब्लिक के डबल मजे, डेमोक्रेसी भी, तानाशाही भी!

व्यंग्य : राजेंद्र शर्मा अब तो मोदी जी के विरोधियों को भी झख मारकर मानना ही पड़ेगा, मोदी जी अपने भारत को वाकई डेमोक्रेसी की मम्मी बना दिए हैं। अब तो वी-डेम इंस्टीट्यूट वालों ने भी इसकी तस्दीक कर दी है। जी हां, स्वीडन के वी-डेम इंस्टीट्यूट वालों ने। उसी वी-डेम इंस्टीट्यूट वालों ने, जो दुनिया…
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संसद खाली करो कि तानाशाही आती है!

बादल सरोज भारत की संसद के दोनों सदनों - लोकसभा और राज्य सभा - से सांसदों के धड़ाधड़ निलंबन का सिलसिला जारी है। इन पंक्तियों के लिखे जाने तक विपक्ष के कितने सांसद निलंबित किये जा चुके हैं, इसे लिखने का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि जब तक यह पंक्तियाँ आपके पढ़ने में आयेंगी, तब तक पूरी आशंका है कि वह…
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