क्या भारत का लोकतंत्र अब ‘नियंत्रित लोकतंत्र’ में बदल गया है?
(आलेख : कृष्ण प्रताप सिंह)
अंदेशे तो पहले से जताए जा रहे थे, लेकिन अब देश के चुनाव आयोग ने जिस तरह सारी लोकलाज (जिसे लोकतांत्रिक बर्ताव का सबसे जरूरी तत्व बताया जाता है) बिसराकर अपनी (अ)विश्वसनीयता से जुड़े सारे सवालों की जवाबदेही की ओर पीठ कर ली, साथ ही चोर के कोतवाल को डांटने की तर्ज पर विपक्षी…
Read More...
Read More...