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उत्तराखंड के हर जिले में बन सकता है CBT परीक्षा केंद्र, मुख्य सचिव ने दिए अहम निर्देश

 देहरादून। उत्तराखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन को बेहतर बनाने और उच्च शिक्षा संस्थानों में निर्माण कार्यों को गति देने के लिए शासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में गुरुवार को सचिवालय में आयोजित व्यय वित्त समिति की बैठक में विभिन्न विभागों के प्रस्तावों पर चर्चा कर सहमति प्रदान की गई। इस दौरान डिग्री कॉलेजों के निर्माण कार्यों में देरी पर मुख्य सचिव ने नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से काम पूरा करने के निर्देश दिए।बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत डिग्री कॉलेजों के निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने कार्यदायी संस्था मंडी परिषद की ओर से विभिन्न विभागों के निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को प्रत्येक परियोजना की समय-सीमा निर्धारित करने और कार्यों की प्रगति से जुड़ी विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव ने कहा कि निर्माण कार्यों को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। विद्यार्थियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कक्षाओं और प्रयोगशालाओं के निर्माण को प्राथमिकता दी जाए, ताकि शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित न हों। उन्होंने आवश्यकतानुसार परियोजनाओं की प्राथमिकता तय कर उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने डिग्री कॉलेजों में बनने वाले परीक्षा भवनों को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) के अनुकूल विकसित करने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक जनपद में कम से कम एक ऐसा परीक्षा केंद्र विकसित किया जाना चाहिए, जहां कर्मचारी चयन आयोग (SSC) और उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की प्रतियोगी परीक्षाएं कंप्यूटर आधारित प्रणाली से आयोजित हो सकें।

इस व्यवस्था से प्रदेश में परीक्षाओं के आयोजन की क्षमता बढ़ने और अभ्यर्थियों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। साथ ही, आधुनिक परीक्षा प्रणाली के लिए आवश्यक आधारभूत ढांचे को मजबूत किया जा सकेगा।

बैठक में मुख्य सचिव ने आईटीआई भवनों के निर्माण में सभी जरूरी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण संस्थानों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण विकसित किया जाए, ताकि प्रशिक्षुओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और व्यावहारिक प्रशिक्षण मिल सके।

बैठक में विभागीय प्रस्तावों की समीक्षा के साथ निर्माण कार्यों में तेजी लाने, समय-सीमा का पालन करने और शैक्षणिक जरूरतों के अनुरूप आधारभूत ढांचा विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया गया।

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